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हिन्दी दिवस पर विशेषः हँसता आया हिन्दी में

डा. जयसिंह आर्य , Sep 14, 2017, 8:03 am IST
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हिन्दी दिवस पर विशेषः हँसता आया हिन्दी में नई दिल्लीः 'जनता जनार्दन' ने ऑडियो के साथ संधान का जो प्रयोग शुरू किया है उसकी सफलता को देखते हुए हम लगातार अध्यात्म के साथ ही समाज और साहित्य के चर्चित लोगों के कृतित्व को यहां प्रस्तुत कर रहे हैं.

लेखन के साथ-साथ उसका ऑडियो स्वरूप प्रस्तुत करने का यह अभिनव प्रयोग जारी है.

इसी क्रम में डा जयसिंह आर्य की कविता, गीत और मुक्तक  की प्रस्तुतियां भी हम प्रस्तुत करते हैं. इस प्रस्तुति की खासियत है कि गजलकार/ गीतकार यहां अपनी ही आवाज के साथ अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं.

प्रस्तुत है डॉ आर्य द्वारा रचित गीत उन्हीं की आवाज में सस्वर पाठ के साथ. ये रचना देशभक्ति के रस में डूबी हुई है, और इसमें एक नए भारत के निर्माण का संदेश गूंजता है. आशा है सुधीजन जरूर आनंद उठायेंगे.

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गीतः
हँसता आया हिन्दी में

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मैं  भारत  में  जन्मा  खेला, खाया  हिन्दी  में
हिन्दी  में  रोया  हूँ , हँसता  आया  हिन्दी  में
*

   हिन्दी  ही  जन-जन  में
    श्रद्धा,  प्रेम   जगाती है,
     अपनेपन,   भाईचारे का
       पाठ       पढ़ाती      है,

मैंने  जो  कुछ  भी  खोया  है  पाया  हिन्दी  में
मैं  भारत  में  जन्मा, खेला,  खाया  हिन्दी  में
*

     रस्ते  में  हिन्दी  के  जो
      रोड़ा      अटकाते    हैं,
       आने   वाले  भारत  की
         पीढ़ी     भटकाते     हैं,

वह  गद्दार  है  जो  ऐसा  युग  लाया  हिन्दी  में
मैं  भारत  में  जन्मा,  खेला,  खाया  हिन्दी  में
*

    अंग्रेज़ी  की  पूजा  करने
      वाला      दुर्जन       है,
        हिन्दी   का  दुश्मन  है
         जो  भारत  का दुश्मन है

क्यों  रहती  है  उन  अरियों  की  काया  हिन्दी  में
मैं  भारत  में  जन्मा,  खेला,  खाया  हिन्दी  में
*

      हिन्दी  के  बेटे  हिन्दी
       का  दिवस   मनाते  हैं
       बात  शर्म  की  है लेकिन
         हम  समझ  न  पाते   हैं

भारत  का  गौरव  पुर्खों  ने  गाया  हिन्दी  में
मैं  भारत  में  जन्मा  खेला  , खाया  हिन्दी  में

- डा. जयसिंह  आर्य, दिल्ली, मौ. 9910701665

(यह गीत मेरे गीत संग्रह "बलिदान यह तुम्हारा" से है)
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