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आज की कविता भ्रमण पर

शशिपाल शर्मा 'बालमित्र' , Jun 19, 2017, 6:47 am IST
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आज की कविता भ्रमण पर नई दिल्लीः भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, काल खंड और सनातन परंपरा के अग्रणी सचेता प्रख्यात संस्कृत विद्वान पंडित शशिपाल शर्मा बालमित्र द्वारा संकलित दैनिक पंचांग, आज की वाणी, इतिहास में आज का दिन और उनकी सुमधुर आवाज में आज का सुभाषित आप प्रतिदिन सुनते हैं.

जैसा कि हमने पहले ही लिखा था, पंडित जी अपनी सामाजिक और सृजनात्मक सक्रियता के लिए भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्यात हैं. उनके पाठकों शुभेच्छुओं का एक बड़ा समूह है.

जनता जनार्दन ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने खास लगाव और उसकी उन्नति, सरंक्षा की दिशा में अपने प्रयासों के क्रम में अध्यात्म के साथ ही समाज और साहित्य के चर्चित लोगों के कृतित्व को लेखन के साथ-साथ ऑडियो रूप में प्रस्तुत करने का अभिनव प्रयोग शुरू कर ही रखा है, और पंडित जी उसके एक बड़े स्तंभ हैं.

इस क्रम में हम आज की कविता, स्वास्थ्य और तन मन में उर्जा भरने वाला संदेश 'मुस्कान मेल' और आज का सुभाषित प्रस्तुत कर रहे हैं. आज का सुभाषित तो अपने साथ इतिहास में आज का दिन, दैनिक पंचांग भी समेटे रहता है.

इसी क्रम में पंडित शशिपाल शर्मा बालमित्र ने एक स्वरचित कविता रची और अपने एक प्रशंसक के अनुरोध पर सस्वर पाठ भी किया. तो आप भी आनंद लीजिए. प्रस्तुत है पंडित शशिपाल शर्मा बालमित्र की कविता उनकी आवाज के ऑडियो के साथः

आज की कविता

आज की कविता भ्रमण पर
   देखती सर्वत्र है।
भूत-प्रेत-पिशाच तीनों
    हो गए एकत्र हैं।।

एक चिंगारी लगाता
   दूसरा घी डालता।
तीसरा फिर खून पीता
आँख उनको मारता।।



दफ़्तर हो सरकारी या कोई
 ग़ैर सरकारी भले।
तिकड़ी वहाँ पर इन खलों की
  जस की तस हमको मिले।।


खून पीकर माँस खाकर
 हड्डियों को बाँटते।
तुम भला कब तक जियोगे
  स्वार्थ अपने साधते।।


सोचना दर्पण के सम्मुख
 जब कभी मौका मिला।
खून के छींटे बदन पर
      देख पाओगे भला।।


आँख में कतरे हैं खूँ के
   देखना आगे मना।
तुमको दिखा दे जो हकीकत
  वो नहीं शीशा बना।।


बालमित्र सुना रहा है
   एक यह चेतावनी।।
क्यों कमाते पाप हो
  जग में चिता सबकी बनी।।

*-शशिपालशर्मा ‛बालमित्र’*
 
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