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'अ' व 'आ' से प्रारम्भ संस्कृत बालगीतम्, भावार्थ सहित: अमुना विभुना मधुना रचितम्

शशिपालशर्मा ‛बालमित्र , Jun 18, 2017, 19:25 pm IST
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 'अ' व 'आ' से प्रारम्भ संस्कृत बालगीतम्, भावार्थ सहित: अमुना विभुना मधुना रचितम् नई दिल्लीः भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, काल खंड और सनातन परंपरा के अग्रणी सचेता प्रख्यात संस्कृत विद्वान पंडित शशिपाल शर्मा बालमित्र द्वारा संकलित दैनिक पंचांग, आज की वाणी, इतिहास में आज का दिन और उनकी सुमधुर आवाज में आज का सुभाषित आप प्रतिदिन सुनते हैं.

जैसा कि हमने पहले ही लिखा था, पंडित जी अपनी सामाजिक और सृजनात्मक सक्रियता के लिए भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्यात हैं. उनके पाठकों शुभेच्छुओं का एक बड़ा समूह है.

जनता जनार्दन ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने खास लगाव और उसकी उन्नति, सरंक्षा की दिशा में अपने प्रयासों के क्रम में अध्यात्म के साथ ही समाज और साहित्य के चर्चित लोगों के कृतित्व को लेखन के साथ-साथ ऑडियो रूप में प्रस्तुत करने का अभिनव प्रयोग शुरू कर ही रखा है, और पंडित जी उसके एक बड़े स्तंभ हैं.

इस क्रम में हम आज की कविता, स्वास्थ्य और तन मन में उर्जा भरने वाला संदेश 'मुस्कान मेल' और आज का सुभाषित प्रस्तुत कर रहे हैं. आज का सुभाषित तो अपने साथ इतिहास में आज का दिन, दैनिक पंचांग भी समेटे रहता है.

इसी क्रम में पंडित शशिपाल शर्मा बालमित्र ने एक स्वरचित कविता रची और अपने एक प्रशंसक के अनुरोध पर सस्वर पाठ भी किया. तो आप भी आनंद लीजिए. प्रस्तुत है पंडित शशिपाल शर्मा बालमित्र की कविता उनकी आवाज के ऑडियो के साथः

संस्कृत कविताः

अमुना विभुना मधुना रचितम्
आम्रस्य फलं पीत् पतितम्।
आकाशपथो मम कर युगले
आश्चर्ययुतं च ममाक्षियुगम्।।

 
आकाशमहं स्वकरौ च मुहुः
अद्भुतमेतत् पश्यामि फलम्।
अशनं करवाणि न वा कुर्याम्
अहमेतत् फलं विचाररतः।।
 

आम्रं गृहीत्वा गृहं गतः
अम्बामपृच्छं प्रश्नमहम्।
आम्रस्य न वृक्षोऽभवत् पथे
आगतं कुतो ह्याम्रस्य फलम्?


अम्बा मां तदाऽवदत् वत्स!
आश्चर्यं त्यक्त्वा प्रभुं नम।
अखिलेशोऽनुग्रहवानभवत्
आम्रस्य फलं ह्यददात् तुभ्यम्।।


अखिलेशं नत्वा फलमेतद्
अशनीयं त्वया मुदा मधुरम्।
अम्बायाः वचनं श्रुतं यदा
अशितं हि मया साम्बं मधुरम्।।

*-शशिपालशर्मा ‛बालमित्रः’*

 # कम से कम 15 पंक्तियों का ऐसा बालगीतम् चाहिए जिसकी प्रत्येक पंक्ति *अ* अथवा *आ* से प्रारम्भ हो, ऐसा किसी मित्र का आज प्रातःकाल आग्रह मिलने पर उल्लिखित कविता लिखी गई ।

भावार्थ सहितः

*अमुना विभुना मधुना रचितम्*
*आम्रस्य फलं पीतं पतितम्।*
*आकाशपथो मम करयुगले*
*आश्चर्ययुतं च ममाक्षियुगम्।।*

(उस सर्वव्यापक के द्वारा मधु से बनाया गया
आम का पीला फल गिरा।
आकाश से मेरे दो हाथों में
मेरी दोनों आँखें भर गईं आश्चर्य से।।)

 

*आकाशमहं स्वकरौ च मुहुः*
*अद्भुतमेतत् पश्यामि फलम्।*
*अशनं करवाणि न वा कुर्याम्*
*अहमेतत् फलं विचाररतः।।*

(आकाश को, दोनों हाथों को और बार-बार
इस अद्भुत फल को देख रहा हूँ।
खाऊँ या न खाऊँ
इस फल को मैं डूबा हूँ इस सोच में।)

 
*आम्रं गृहीत्वा गृहं गतः*
*अम्बामपृच्छं प्रश्नमहम्।*
*आम्रस्य न वृक्षोऽभवत् पथे*
*आगतं कुतो ह्याम्रस्य फलम्?*

(आम लेकर घर को गया
माँ से पूछा प्रश्न मैंने-
आम का वृक्ष पथ में न था,
कहाँ से आ ही गया आम का फल?)


*अम्बा मां तदाऽवदत् वत्स!*
*आश्चर्यं त्यक्त्वा प्रभुं नम।*
*अखिलेशोऽनुग्रहवानभवत्*
*आम्रस्य फलं ह्यददात्(हि+अददात्) तुभ्यम्।।*

(माँ ने मुझे तब कहा- लाडले!
हैरानी छोड़कर प्रभु को प्रणाम कर।
अखिल जगत के ईश कृपालु हुए
आम का फल उन्होंने ही दिया तुझे।)



*अखिलेशं नत्वा फलमेतद्*
*अशनीयं त्वया मुदा मधुरम्।*
*अम्बायाः वचनं श्रुतं यदा*
*अशितं हि मया साम्बं मधुरम्।।*

[अखिल जगत के ईश को प्रणाम करके यह फल
खाना है तुझे प्रसन्नता से मधुर।
माँ की बात को  सुनकर तब
खाया गया मेरे द्वारा माँ के साथ वह मधुर(आम)।]  


*शशिपालशर्मा ‛बालमित्रः’*
 
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