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Jul 05, 2015, 11:52 am    by : अनंत विजय
साहित्य और बाजार, यह एक ऐसा विषय है जिसको लेकर हिंदी के साहित्यकार बहुधा बचते हैं या फिर मौका मिलते ही बाजार की लानत मलामत करने में जुट जाते हैं । बाजार एक ऐसा पंचिंग बैग है जिस पर हिंदी साहित्य
Apr 19, 2015, 15:51 pm    by : अनंत विजय
हिंदी साहित्य में यह बात हमेशा से कही और सुनी जाती रही है कि कोई सिर्फ साहित्य लिखकर अपना जीवन यापन नहीं कर सकता है । यह बात बहुत हद तक सही भी है क्योंकि हिंदी साहित्य में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है
Feb 22, 2015, 12:25 pm    by : अनंत विजय
पिछले साल की तरह इस साल भी पुस्तक मेले के खत्म होते ही दिल्ली के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है । ठंड एक बार फिर से दस्तक देने को बेताब है । पिछले वर्ष पुस्तक मेले में हुए विमर्श की गर्मागट लं
Feb 16, 2015, 15:54 pm    by : अनंत विजय
शनिवार से अगले बाइस फरवरी तक दिल्ली में विश्व पुस्तक मेला शुरू हो चुका है । इस बार के पुस्तक मेले में सम्मानित अतिथि देश सिंगापुर है और थीम पू्र्वोत्तर भारत के उभरते स्वर तो फोकस देश दक्षिण क
Jan 11, 2015, 14:04 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
बच्चों और किशोरों तक पहुंच बढ़ाने के लक्ष्य के साथ भारतीय सेना देश के चो‍टी के कॉमिक्स बुक पब्लिशर्स के साथ एक वॉरियर्स सीरीज के सिलसिले में बातचीत कर रही है। इस सीरीज में सैनिकों को देश के लि
Nov 23, 2014, 16:19 pm    by : अनंत विजय
हिंदी साहित्य और पाठकीयता पर हिंदी में लंबे समय से चर्चा होती रही है । लेखकों और प्रकाशकों के बीच पाठकों की संख्या को लेकर लंबे समय से विवाद होता रहा है । साहित्य सृजन कर रहे लेखकों को लगता है क
Sep 02, 2013, 13:43 pm    by : अनंत विजय
आज हिंदी में एक अनुमान के मुताबिक 500 से ज्यादा कवि लगातार कविताएं लिख रहे हैं । छप भी रहे हैं । उसमें बुरी कविताओं की बहुतायत है । हिंदी में बुरी और स्तरहीन कविताओं के शोरगुल में अच्छी कविताएं क
Aug 11, 2012, 12:54 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
अंग्रेजी लेखकों और प्रकाशकों को विशाल हिंदी पाठक वर्ग की हैसियत का बखूबी अंदाजा है और इसलिए उन्होंने अंग्रेजी किताबों को अनुवाद के सहारे हिंदी बाजार में खपाने का प्रयास तेज कर दिया है।अंग्
Apr 27, 2012, 11:10 am    by : जनता जनार्दन संवाददाता
छोटे बच्चों की किताबों में ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट और सी फॉर कैट अब बीते जमाने की बात होती जा रही है। कुछ ऐसे ही संकेत उत्तर प्रदेश से मिल रहे हैं। सूबे के मुरादाबाद जिले में स्कूली बच्चे अब हिंस
Jul 28, 2011, 16:43 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
अंग्रेजी प्रकाशकों का तंत्र बेहद मजबूत और प्रोफेशन है जबकि हिंदी का प्रकाशन व्यवसाय अब भी पारिवारिक कारोबार है । किसी भी हिंदी प्रकाशन गृह में प्रोफेशनलिज्म का घोर अभाव है । अंग्रेजी के मुक