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Aug 07, 2017, 19:12 pm    by : मनोज पाठक
आनन्द चाहिये, तन का, मन का तो तन को तानिये, मन को साधिये, प्राणों के योग द्वारा , बिना प्राणों को जाने, प्राणों के आवागमन के साथ तन का रमण किये मन को नहीं जाना जा सकता और ना ही तन की सीमाओं का अतिक्रम
Jun 21, 2017, 8:08 am    by : त्रिभुवन
हमने सिर्फ़ आसनों को ही योग का नाम दे दिया है। आसन सिखाने वाला हर व्यक्ति अपने आपको योग गुुरु घोषित कर रहा है आैर मुझे लगता है कि यह न केवल ग़लत है, बल्कि भारतीय मनीषा की मानव-समाज को सबसे बड़ी देन
Jun 19, 2016, 17:51 pm    by : प्रणव पण्ड्या
योग ग्रन्थों में कई तरह के योगों का वर्णन मिलता है. ज्ञानयोग, कर्मयोग, हठयोग, राजयोग, प्राणयोग, स्वरयोग, सूर्ययोग, नादयोग, बिन्दुयोग, कुण्डलिनी योग आदि योगों के बारे में विस्तार से बताया गया है.
Jun 19, 2016, 15:10 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
योग से बाहरी और आंतरिक सौंदर्य को निखारने में मदद मिलती है तथा चमकती त्वचा, चमकीले काले बालों, छरहरे सुंदर बदन, सजीली आकृति के लिए योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाइए.