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May 28, 2011, 12:54 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
लिफाफ़ा अच्छा हो, तो ज़रूरी नहीं कि अंदर का मजमून भी उम्दा होगा. स्पीक एशिया नामक कंपनी ने यही किया. हर्षद मेहता ने तो सिस्टम को चुना लगाया था, जिसमें लोग लुटे, पर यहां तो लोग आते गये, खुद पैसे लुट