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Oct 13, 2015, 12:37 pm    by : श्याम नन्दन
भारत की अन्य भाषाओं से सामंजस्य बनाने में हिन्दी की बहुत ही सार्थक भूमिका है। हिन्दी का, किसी भी भाषा से कोई द्वेष नहीं हैं। ये बात बार-बार कही गई है लेकिन कुछ प्रदेशों को छोड़कर, केवल क्षेत्रीय