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Jan 11, 2016, 14:28 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
विश्व हिंदी दिवस है, यह महज एक दिवस नहीं बल्कि विश्व पटल पर यह दिखाने की कोशिश है कि हिंदी अभी मरी नहीं, जिंदा है। भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई छोटे और बड़े देशों में भी हिंदी बोली, पढ़ी और स
Dec 21, 2015, 15:15 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
हिंदी साहित्य के लिए इस वर्ष के साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि रामदरश मिश्र का कहना है कि 'कविता मेरा पहला प्रेम है' और साहित्य अकादेमी तो एक' आंगन' की तरह ह
Sep 13, 2015, 15:36 pm    by : अनंत विजय
भोपाल में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन खत्म हो गया । इस तरह के सम्मेलनों की सार्थकता को लेकर पिछले हफ्ते भर से सवाल खड़े किए जा रहे हैं । एक खास वर्ग और खास विचारधारा के लेखकों के द्वारा । इन सवाल
Aug 28, 2015, 18:10 pm    by : अनंत विजय
आज अगर समकालीन हिंदी साहित्य के परिदृश्य में एक अजीब तरह का ठंडापन और वैचारिक सन्नाटा जैसा नजर आता है तो हंस पत्रिका के संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की कमी शिद्दत से महसूस की जाती है । यह क
Jul 05, 2015, 11:52 am    by : अनंत विजय
साहित्य और बाजार, यह एक ऐसा विषय है जिसको लेकर हिंदी के साहित्यकार बहुधा बचते हैं या फिर मौका मिलते ही बाजार की लानत मलामत करने में जुट जाते हैं । बाजार एक ऐसा पंचिंग बैग है जिस पर हिंदी साहित्य
Jun 15, 2015, 18:00 pm    by : अनंत विजय
हिंदी साहित्य के इतिहास में पत्र साहित्य की समृद्धशाली परंपरा रही है । हिंदी में पत्र साहित्य को अमूमन तीन भागों में बांटा जाता है- पहला व्यक्तिगत पत्रों के संकलन, कई किताबों के परिशिष्ट आदि
Jun 07, 2015, 16:57 pm    by : अनंत विजय
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार हर दिन नए नए विवाद में फंसती नजर आती है । उपराज्यपाल के साथ अफसरों की तैनाती को लेकर विवाद चल ही रहा है । इस विवाद के शोरगुल में दिल्ली की भाषाई अकादमियों मे
May 26, 2015, 16:54 pm    by : अनंत विजय
रामधारी सिंह दिनकर ने साफ तौर पर लिखा है –साहित्य के क्षेत्र में हम न तो किसी गोयबेल्स की सत्ता मानने को तैयार हैं, जो हमसे नाजीवाद का समर्थन लिखवाए और न ही किसी स्टालिन की ही, जो हमें साम्यवाद
May 20, 2015, 16:24 pm    by : अनंत विजय
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर । हिंदी साहित्य का एक ऐसा सितारा है जिसने विपुल लेखन किया । उन्हें ज्ञानपीठ समेत कई पुरस्कार मिले लेकिन किसी खास विचारधारा को नहीं मानने की वजह से उनके लेखन का
May 13, 2015, 16:57 pm    by : अंशु
हिंदी साहित जगत में बॉलीवुड के लेखक आज भी अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत है लेकिन इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि साहित्य जगत बॉलीवुड के लेखकों को गंभीरता से नहीं लेता। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार व