Wednesday, 18 September 2019  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 
खोजें
Jan 11, 2018, 16:46 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
मुझे यह कहने में कत्तई संकोच नहीं कि 'रेखना मेरी जान' पढ़ते समय आपको यह किताब बेशकीमती मालूम होगी. किसी शब्दचित्र, इतिहास और साइंस फिल्म की तरह यह आपको आर्कटिक से बंगलादेश तक, प्रेम से बिछोह
Jun 02, 2017, 19:00 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
धर्म मनुष्यता का बोध है, वैश्विक चेतना का विस्तार है। जब कामायनी में मनु महाराज के अवतरण के बाद उन्हें जीवन का उद्देश्य बताया गया, तो प्रसाद लिखते हैं- औरों को हँसते देखो मनु, हंसो और सुख पाओ/ अप
May 29, 2017, 17:06 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
पिछली कड़ी में हमने हिंदी के युवा और बहुचर्चित आलोचक अनंत विजय के लेख 'हिंदी में मिथकों से परहेज क्यों?' का संदर्भ देते हुए व्हाट्सएप के लब्धप्रतिष्ठित 'साहित्य' समूह में चली का जिक्र क
Feb 13, 2017, 21:46 pm    by : श्रेष्ठ गुप्ता
देश के दूसरे सबसे बड़े पुस्तक मेले यानी "पटना पुस्तक मेला" में जब एक मंच पर दो दिग्गज पत्रकार नजर आए और सवाल-जवाब का सिलसिला चला तो दर्शक दीर्घा में मौजूद लोगों ने भरपूर आनंद लिया. 'हिन्दुस्ता
May 13, 2015, 16:57 pm    by : अंशु
हिंदी साहित जगत में बॉलीवुड के लेखक आज भी अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत है लेकिन इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि साहित्य जगत बॉलीवुड के लेखकों को गंभीरता से नहीं लेता। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार व
Dec 22, 2014, 17:27 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
अखिल भारतीय कलमकार कहानी प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में संपन्न हुआ। पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखिका चित्रा मुद्गल ने की और विश
Oct 26, 2014, 13:12 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी की जीत से ये साबित हो गया है कि भारत में अब भी लोगों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में भरोसा कायम है। दोनों राज्यों में अकेले दम पर पहली बार बीजेपी ने अपनी धमक
Dec 04, 2012, 14:28 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
दो दिसम्बर का सर्द दिन आईटीओ स्थित हिंदी भवन में हिंदी की स्थिति को लेकर धुंआधार विमर्श से दिन भर गरमाता रहा। कलमकार संस्था द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार "हिंदी विश्व भाषा 2050" कई मायनो में म
Sep 12, 2011, 17:58 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
पता नहीं हमारे समाज के बुद्धिजीवी किस दुनिया में जी रहे हैं । अन्ना के समर्थन में उमड़े जनसैलाब में दलितो,अल्पसंख्यकों और आदिवासियों को ढूंढने में लगे हैं । बड़े लक्ष्य को लेकर चल रहे अन्ना ह
Sep 03, 2011, 19:05 pm    by : अनंत विजय
कविता में शब्दों का चयन उसे चमका देती है लेकिन अगर वही शब्द अगर जबरदस्ती ठूंसे जाते हैं तो स्पीड ब्रेकर की तरह झटके भी देते हैं । अपनी कविता को लेकर इमोशनल कवयित्री इतने पर ही नहीं रुकती हैं- पा