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Sep 06, 2018, 13:04 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
हिंदी साहित्य में नवगीत को महत्त्वपूर्ण स्थान दिलाने में डॉक्टर शम्भुनाथ सिंह की बेहद खास भूमिका रही, इसीलिए उन्हें नवगीत का शिखर पुरूष माना जाता है. उन्होंने ही सर्वप्रथम 1954-55 में इलाहाबाद म
Jul 30, 2017, 11:35 am    by : मृत्युंजय दीक्षित
हिंदी साहित्य के महान कवि संत तुलसीदास का जन्म संवत 1956 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्तमूल नक्षत्र में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्मा रामदुबे व माता का नाम हुलसी था। जन्म के समय तुलसीदास र
Jun 02, 2017, 19:00 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
धर्म मनुष्यता का बोध है, वैश्विक चेतना का विस्तार है। जब कामायनी में मनु महाराज के अवतरण के बाद उन्हें जीवन का उद्देश्य बताया गया, तो प्रसाद लिखते हैं- औरों को हँसते देखो मनु, हंसो और सुख पाओ/ अप
May 29, 2017, 17:06 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
पिछली कड़ी में हमने हिंदी के युवा और बहुचर्चित आलोचक अनंत विजय के लेख 'हिंदी में मिथकों से परहेज क्यों?' का संदर्भ देते हुए व्हाट्सएप के लब्धप्रतिष्ठित 'साहित्य' समूह में चली का जिक्र क
May 22, 2017, 18:22 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
साहित्य जगत में इन दिनों अमिष त्रिपाठी की किताब 'सीता, द वॉरियर ऑफ मिथिला', को लेकर उत्सुकता का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी इस किताब को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। पहले केंद्रीय मंत्री स्मृ
Jan 11, 2016, 14:28 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
विश्व हिंदी दिवस है, यह महज एक दिवस नहीं बल्कि विश्व पटल पर यह दिखाने की कोशिश है कि हिंदी अभी मरी नहीं, जिंदा है। भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई छोटे और बड़े देशों में भी हिंदी बोली, पढ़ी और स
Dec 21, 2015, 15:15 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
हिंदी साहित्य के लिए इस वर्ष के साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि रामदरश मिश्र का कहना है कि 'कविता मेरा पहला प्रेम है' और साहित्य अकादेमी तो एक' आंगन' की तरह ह
Aug 28, 2015, 18:10 pm    by : अनंत विजय
आज अगर समकालीन हिंदी साहित्य के परिदृश्य में एक अजीब तरह का ठंडापन और वैचारिक सन्नाटा जैसा नजर आता है तो हंस पत्रिका के संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की कमी शिद्दत से महसूस की जाती है । यह क
Jul 05, 2015, 11:52 am    by : अनंत विजय
साहित्य और बाजार, यह एक ऐसा विषय है जिसको लेकर हिंदी के साहित्यकार बहुधा बचते हैं या फिर मौका मिलते ही बाजार की लानत मलामत करने में जुट जाते हैं । बाजार एक ऐसा पंचिंग बैग है जिस पर हिंदी साहित्य
Jun 15, 2015, 18:00 pm    by : अनंत विजय
हिंदी साहित्य के इतिहास में पत्र साहित्य की समृद्धशाली परंपरा रही है । हिंदी में पत्र साहित्य को अमूमन तीन भागों में बांटा जाता है- पहला व्यक्तिगत पत्रों के संकलन, कई किताबों के परिशिष्ट आदि