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Jun 26, 2017, 17:22 pm    by : अरशाना अज़मत
औरतों की ईद यानी ..रोज के मुकाबले जल्दी जगने का दिन ..बावर्चीखाने में ज्यादा खटने का दिन ..ज्यादा खाना पकाने का दिन..ज्यादा तरह के खाने पकाने का दिन ..ज्यादा बर्तन धोने का दिन..ज्यादा सफाई करने का द
Nov 27, 2016, 19:22 pm    by : अनिल चौबे
देश में नोटबंदी को लेकर बैंकों और एटीएम के सामने जितनी लंबी लाइनें हैं, उससे कम बड़ा मजमा सोशल मीडिया पर नहीं. एक बड़े साहित्यकार, पत्रकार मित्र ने अपनी फेसबुक वाल पर यह कविता इन्हीं शब्दों मे
Dec 27, 2015, 13:39 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
समकालीन हिंदी कविता के सातवें दशक के महत्वपूर्ण कवि पंकज सिंह का हृदय गति रुकने से शनिवार को निधन हो गया. मुजफ्फरपुर के पंकज सिंह लंबे समय से दिल्ली में ही रह रहे थे. वे 67 वर्ष के थे. उन्होंने शन
Sep 07, 2014, 16:28 pm    by : अंनत विजय
हिंदी कविता के महानतम हस्ताक्षरों में से एक गजानन माधव मुक्तिबोध के ऩिधन के पचास साल इसी सितंबर में पूरे हो रहे हैं । सितंबर उन्नीस सौ पैंसठ के नया ज्ञानोदय में कवि श्रीकांत वर्मा का एक लेख छप