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Feb 20, 2020, 17:58 pm    by : गोपाल जी राय/वरिष्ठ पत्रकार और स्तम्भकार
कहते हैं कि वर्तमान में ही इतिहास गढ़ा जाता है। लेकिन यह कैसी विडंबना है कि समकालीन वर्तमान अपने धवल अतीत को पुनः गढ़ पाने में असहाय प्रतीत होता है। यह कौन नहीं जानता कि अमूमन इतिहास खुद को दुहर
Feb 21, 2019, 17:15 pm    by : गोपाल जी राय
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर र
Jun 29, 2018, 16:37 pm    by : गोपाल जी राय
भारतीय राजनीति में जब भी किसानों की चर्चा होती है तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार संगठित करने वाले दंडी स्वामी स्वामी सहजानन्द सरस्वती की याद बरबस आ जाती है। यदि यह कहा जाए कि स्वामी जी क