खोजें
Jun 17, 2015, 17:19 pm    by : अनंत विजय
अब यह बीते जमाने की बात लगने लगी है कि साहित्यक पत्रिकाएं समकालीन साहित्य परिदृश्य में सार्थक हस्तक्षेप किया करती थी । हिंदी में साहित्यक पत्रिकाओं का बहुत ही समृद्ध इतिहास रहा है । दरअसल यह
Jun 13, 2011, 16:38 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
साहित्यक पत्रिकाओं की इस भीड़ में एक बात जो दब कर रह गई । हुआ यह कि कहानी कविता और आलोचना की आंधी में वैचारिक लेख और साहित्येतर विषय इन पत्रिकाओं से गायब होते चले गए । हिंदी में गंभीर वैचारिक प