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Jul 31, 2020, 20:54 pm    by : अमिय पाण्डेय
साहित्य के शिखर पुरुष मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन पर सच की दस्तक के तत्वाधान में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी में भाग लेते हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी,स
Jul 25, 2020, 8:23 am    by : गौरव अवस्थी
हिंदी साहित्य के उपवन में शिवमंगल सिंह नाम का यह "सुमन" बीसवीं सदी के शुरुआती वर्ष 1916 में खिला था. रीवा राज्य की सेना में जनरल रहे ठाकुर साहब बख्श सिंह के आंगन में श्रावण मास की पंचमी (नाग पंचमी) प
May 22, 2020, 19:02 pm    by : अमिय पाण्डेय
कोरोना काल में कला साहित्य संस्कृति वह सामाजिक सरोकार की मासिक पत्रिका सच की दस्तक का प्रकाशित संयुक्तांक एक अति प्रशंसनीय प्रयास है ।इस प्रकाशन के लिए पत्रिका के संरक्षक सम्पादक सहित समस
Aug 14, 2019, 12:23 pm    by : गोपाल जी राय
जब जब भारत में स्वतंत्रता संग्राम के मूर्त-अमूर्त वीरों की गाथा गाई जाती है, तब तब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के 'प्रथम उद्घोषक' रहे महानायक फतेह बहादुर शाही की याद सबसे पहले आती है। क्योंक
Jul 13, 2019, 14:10 pm    by : अजय पुंज
साहित्य अकादेमी मैथिली भाषा में अमित पाठक कृत राग-उपराग (कविता) पुस्तक को वर्ष 2019 का साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार और ऋषि बशिष्ठ कृत ई फूलक गुलदस्ता (कथा-संग्रह) को बाल साहित्य पुरस्कार देने क
Jan 14, 2019, 18:20 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
आज महाश्वेता का जन्मदिन है. अगर वह जिंदा होतीं, तो 93 की होतीं. अपने नाम की ही तरह साफ, उजली और सफ्फ़ाक. उन्होंने ताउम्र लेखन व संघर्ष उनके लिए किया जो जूझ रहे थे अपनी पहचान के लिए. इसीलिए वह बड़ी साहि
Oct 18, 2018, 20:47 pm    by : अमित मौर्या
रावण उत्तम कुल का था. वह वह पुलत्स्कर का नाती और विशेश्रवा का बेटा था. पुलत्स्कर ने विश्व संस्कृत को प्रथम रंगमंच दिया था और ग्रीक नाट्य साहित्य में उसका उल्लेख "पुलित्ज़र" के नाम से मिलता है. र
Oct 05, 2018, 18:46 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
विप्लवी पुस्तकालय, प्रलेस बेगूसराय एवं नीलांबर कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में पिछले दिनों गोदरगावां के चर्चित विप्लवी पुस्तकालय में 'गांधी की परिकल्पना का भारत' विषय पर परिचर्चा एवं
Sep 06, 2018, 13:04 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
हिंदी साहित्य में नवगीत को महत्त्वपूर्ण स्थान दिलाने में डॉक्टर शम्भुनाथ सिंह की बेहद खास भूमिका रही, इसीलिए उन्हें नवगीत का शिखर पुरूष माना जाता है. उन्होंने ही सर्वप्रथम 1954-55 में इलाहाबाद म
Aug 17, 2018, 16:07 pm    by : जनता जनार्दन डेस्क
पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी जितने राजनेता के रूप में सराहे गए उससे कहीं ज्यादा अपनी कविताओं के लिए चर्चित रहे। वाजपेयी ने कई दफे अभिव्यक्ति के लिए कविता को माध्यम बनाया। व