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Sep 29, 2020, 19:10 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
अब आकाश में कोरोना घना है..." यह कहानी संग्रह वह पुस्तक है जो दर्द से भरी सत्य कथाओं के द्वारा कालांतर में अनदेखे काले अध्याय के द्वारा मानव समाज को झंझोड़ता रहेगा. सभी कहानियों के लेखकों ने
Sep 12, 2020, 18:02 pm    by : त्रिभुवन
अग्निवेश एक अलग तरह के साधु और एक विलक्षण तरह कर सामाजिक नेता थे। उनके व्यक्तित्व में सम्मोहन और उनकी भाषा में एक आज था। वे विवादास्पद भी थे। वे विवादों को निमंत्रित भी करते थे। लेकिन सच में व
Jul 31, 2020, 20:54 pm    by : अमिय पाण्डेय
साहित्य के शिखर पुरुष मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन पर सच की दस्तक के तत्वाधान में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी में भाग लेते हुए प्रसिद्ध रंगकर्मी,स
Jul 25, 2020, 8:33 am    by : गौरव अवस्थी
देश के श्रेष्ठ गीतकार एवं राजनेता बालकवि बैरागी ने इन पंक्तियों के लेखक को खुद एक संस्मरण ने बताया था की सुमन जी की वजह से ही वह उच्च शिक्षा ग्रहण कर पाए. अगर उन्होंने आर्थिक एवं  शिक्षा में मद
Jun 02, 2020, 9:52 am    by : पार्थ बैनर्जी
1968 में रेवरेंड मार्टिन लूथर किंग की हत्या के बाद अमेरिकी अंतरात्मा को झकझोर देने वाली भारी जन-आक्रोश अब 2020 के कोरोनावायरस संकट में अचंभित कर रही है
May 22, 2020, 19:02 pm    by : अमिय पाण्डेय
कोरोना काल में कला साहित्य संस्कृति वह सामाजिक सरोकार की मासिक पत्रिका सच की दस्तक का प्रकाशित संयुक्तांक एक अति प्रशंसनीय प्रयास है ।इस प्रकाशन के लिए पत्रिका के संरक्षक सम्पादक सहित समस
Mar 30, 2020, 18:55 pm    by : श्रीकांत अस्थाना
जिस समय पूरी दुनिया का बड़ा हिस्सा किसी एक धारा में बह रहा हो और उसके पक्ष में तर्क गढ़ रहा हो उस समय उसकी उलटी धारा में सोचना और बोलना कई तरह के खतरे जरूर पैदा करता है। लेकिन क्या यह खतरा सिर्फ इ
Mar 02, 2020, 13:02 pm    by : डॉ संजय कुमार
उल्लेखनीय है कि देश का बड़ा बुद्धिजिवी वर्ग भी इसके विरोध में खड़ा है। समस्या यह है कि बुद्धिजीवी वर्ग अपने विरोध में इतना मूल्यात्मक हो जाता है कि वो वास्तविक सच्चाई से बहुत दूर खड़ा हो जाता है।
Feb 20, 2020, 17:58 pm    by : गोपाल जी राय/वरिष्ठ पत्रकार और स्तम्भकार
कहते हैं कि वर्तमान में ही इतिहास गढ़ा जाता है। लेकिन यह कैसी विडंबना है कि समकालीन वर्तमान अपने धवल अतीत को पुनः गढ़ पाने में असहाय प्रतीत होता है। यह कौन नहीं जानता कि अमूमन इतिहास खुद को दुहर
Dec 30, 2019, 18:52 pm    by : गोपाल जी राय
अपने ही चाहने वालों के निज स्वार्थपरक फितरतों से समाजवादी राजनीति इतनी क्षत-विक्षत हो जाएगी, शायद समाजवादी नेताओं ने इसकी परिकल्पना कभी भी नहीं की होगी। लेकिन विचारों की जगह समीकरण साधने वा