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Sep 03, 2017, 19:31 pm    by : पंडित शशिपाल शर्मा 'बालमित्र'
विप्र ने पहला वर भक्ति का माँगकर सभी मायाग्रस्त सभी जीवों पर क्रोध न करने का वर माँगा है। भगवान आप कृपासिंधु हैं अतः आप सब जीवों पर अक्रोध बनाए रखें। इस वर के लाभार्थी तो इस 28वें कलिकाल के वासी
Sep 02, 2017, 8:00 am    by : पंडित शशिपाल शर्मा 'बालमित्र'
हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले शिव को मैं नमस्कार करता हूँ जो तीनों प्रका के कष्टों का निवारण करते हैं । निश्चित ही त्रिशूल 3 प्रकार के कष्टों दैनिक, दैविक, भौतिक के विनाश का सूचक है। इसमें 3 तरह
Sep 01, 2017, 7:18 am    by : पंडित शशिपाल शर्मा 'बालमित्र'
विपत्ति के समय लोककल्याण के लिए कंठ में हलाहल विष को धारण करने वाले शिव ने लोगों के निरंतर कल्याण के लिए गंगा को केवल भगीरथ की तपस्या सफल करने के लिए ही धारण नहीं किया था, अपितु विष्णुजी के वामन
Aug 31, 2017, 7:36 am    by : पंडित शशिपाल शर्मा 'बालमित्र'
निर्वाणरूपं- भगवान साक्षात निर्वाणरूप हैं अतः जन्म-मरण आदि समस्त कष्टों से वहाँ मुक्ति है। ‛पुनरपि मरणं पुनरपि जननं' के भीतर ही समस्त कष्ट समाए हैं। इस प्रकार जन्म-मरण के बंधन में पड़े हम स
Aug 30, 2017, 7:30 am    by : जगदीश प्रसाद दुबे
गुरू जी मुझसे हित की बात कहते थे, परन्तु मुझे उनकी बात अच्छी नहीं लगती थी. श्री भुशुण्डि जी आग कहते हैं कि एक बार मैं शिव जी के मन्दिर में शिव नाम का जाप कर रहा था उसी समय गुरू जी वहां आ गये पर अभिम
Aug 25, 2017, 6:46 am    by : जगदीश प्रसाद दुबे
कलियुग में सतोगुण विल्कुल नहीं रहता. तमोगुण और रजोगुण की अधिकता हो जाती है, इसीलिये कलियुग में चारो ओर काम, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार आदि के कारण वैर, विरोध, आतंक, भय का वातावरण बना रहता है. युग च
Aug 19, 2017, 7:54 am    by : जगदीश प्रसाद दुबे
कलियुग में बिना कारण के अभिमान बढा रहेगा. थोडा सा कुछ भी मिल गया अहंकार हो जाता है. मनुष्य यह नहीं सोचता कि यह जो कुछ भी है, प्रभु की कृपा से ही प्राप्त है और प्रलय तक तो जीवित रहना नहीं है. मनुष्य
Aug 17, 2017, 7:06 am    by : रामवीर सिंह
तर्क के बल पर ईजाद किया हुआ कोई भी पथ समता नहीं ला सकता। इसलिए कहा है कि अंत में कल्पित मार्ग पर चलने से "पावहिं दुख भय रुज सोक वियोग"। शंकराचार्य जी ने तो वैदिक मार्ग से हट कर अन्य कुछ स्वीकार ही
Aug 13, 2017, 20:28 pm    by : रामवीर सिंह
वेदों में वर्ण व्यवस्था जीव के कारण शरीर में तीन गुणों के अनुपात पर आधारित है। इसी प्रकार आश्रम व्यवस्था आयु के अनुसार होती है। वेदों ने वर्णाश्रम के अनुसार कर्तव्य निर्धारित कर रखे हैं। सना
Aug 12, 2017, 7:12 am    by : रामवीर सिंह
हमारे शास्त्रों में बहुत से विज्ञान के सिद्धांतों का दर्शन है। कम्प्यूटर में या किसी चिप पर अगर कोई फ़ाइल सुरक्षित करके रख ली जाती है तो उसकी आयु तब तक की हो गई जब तक वह धातुनिर्मित चिप काल के प