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Apr 09, 2018, 10:09 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
विरोध का यह संस्थागत रूप राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान को लेकर बेहद खतरनाक है. संसद का यह पूरा सत्र बिना कामकाज के खत्म हुआ. हम सबको यह समझने की जरूरत है कि देश बचेगा, बचा रहेगा, तभी मिलेगा किसी
May 08, 2016, 6:05 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय जनता पार्टी आक्रामक है, न केवल राष्ट्रवाद के मसले पर बल्कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी. अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की डील पर इटली की कोर्ट से आए फैसले ने उसे ऐसा हथियार मुहैय
Jan 26, 2016, 2:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल छब्बीस जनवरी आती है, और इसके साथ ही देश को अवसर मिलता है, उन लोगों को, स्वतंत्रता सेनानियों को, कर्णधारों को याद करने का, जिनकी बदौलत न केवल हमें आजादी मिली, बल्कि जिनके चलते हमें दुनिया का
Sep 08, 2015, 1:19 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
यह अब कोई छिपी बात नहीं है कि एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा का अपना कोई अलग वजूद नहीं, सिवाय इसके कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक राजनीतिक शाखा भर है. संघ ने लाल कृष्ण आडवाणी को किनारे लगा क
Aug 15, 2015, 11:29 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
लाल किला से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर खोखले शब्दों के जो बम गोले फेंके, उसकी तपिश से भज-भज मंडली से जुड़े भक्तजन भले ही प्रभावित हों, पर जिन्होंने भी सीधे या ट
Jul 25, 2015, 1:18 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक बिहार पर बहुत मेहरबान हो गए हैं और 25 जुलाई को पटना में उन्होंने राज्य की तरक्की के लिए 3.75 लाख करोड़ रुपए देने की घोषणा कर दी. जबान से किसी को कुछ भी देने में क्या
May 01, 2015, 3:31 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश की राजधानी दिल्ली के दिल जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान जिस तरह से गजेंद्र सिंह की जान गई, उससे न केवल देश के किसानों की समस्या, आम आदमी की बेचारगी और उसकी किसी भी तरह से कुछ कर ग
Apr 08, 2015, 3:51 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश की राजधानी दिल्ली में फिलहाल घोषणाओं का मौसम है. वादों, उद्घाटनों और बड़बोलेपन के दौर ने सियासी पारे को अच्छा-खासा उपर चढ़ा दिया है. यह अलग बात है कि प्रकृति अभी दिल्लीवासियों पर मेहरबान है औ
Apr 25, 2011, 1:49 am    by : आशुतोष
सत्ता कहने को लोकतांत्रिक है लेकिन फैसले चंद लोगों के हाथ में सिमट कर रह गए हैं। पार्टी सिस्टम की वजह से राजनीतिक दलों में लोकतंत्र पूरी तरह से गायब है। कांग्रेस में वही होता है जो सोनिया गांध