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Apr 16, 2018, 11:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
एक देश और उसके नागरिक के रूप में यह देखना कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि बलात्कार जैसे घातक अपराध का भी जातीय-धार्मिक विभाजन हो रहा. उन्नाव हो या कठुआ, दिल्ली हो या पटना, निर्भया हो या आसिफा, बेटिया
Jun 06, 2016, 1:39 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
उत्तर प्रदेश की सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस घटना के बाद समूचे राज्य पर सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाए. ताकि दूसरे भी सबक ले सकें और ऐसे हादसे दोबारा न हों. अन्यथा दिल्ली की मेट्रो ट्रेन मे
Apr 28, 2016, 11:17 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश में अपने आपको सर्वोपरि समझने वाले हमारे माननीय जनप्रतिनिधियों को कायदे से देश में लागू कानूनों का पालन करना चाहिए, पर होता इसका उल्टा है. या तो मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए या फिर अप
Sep 24, 2015, 4:47 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
बिहार में विधान सभा चुनाव की सरगर्मी अपने शबाब पर है. वैसे तो किसी भी राज्य में विधानसभा का चुनाव उस राज्य के निवासियों के भविष्य से जुड़ा स्थानीय चुनाव होता है, पर जब से नरेन्द्र मोदी की अगुआई
Jun 07, 2015, 3:35 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आम जनता में प्रधानमंत्री के रूप में भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल की सरकार की कार्यप्रणाली को लेक
May 01, 2015, 3:31 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश की राजधानी दिल्ली के दिल जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान जिस तरह से गजेंद्र सिंह की जान गई, उससे न केवल देश के किसानों की समस्या, आम आदमी की बेचारगी और उसकी किसी भी तरह से कुछ कर ग
Apr 08, 2015, 3:51 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश की राजधानी दिल्ली में फिलहाल घोषणाओं का मौसम है. वादों, उद्घाटनों और बड़बोलेपन के दौर ने सियासी पारे को अच्छा-खासा उपर चढ़ा दिया है. यह अलग बात है कि प्रकृति अभी दिल्लीवासियों पर मेहरबान है औ
Mar 07, 2015, 12:25 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आम आदमी पार्टी में जो कुछ चल रहा, उससे यह उजागर होता है कि हमारे नेताओं में अहम कितना है? और सफलता कैसे इनका दिमाग खराब कर देती है. योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण का योगदान 'आप' की दिल्ली की स
Feb 10, 2015, 5:51 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के नतीजों का सबक जितना हारने वालों के लिए है, उतना ही जीतने वालों के लिए भी। यह लोकतंत्र में जनता के असली 'राजा' होने का वह सबक है, जिसे सत्ता, पैसे और ताकत के दंभ में अ
Dec 08, 2013, 4:38 am    by : जय प्रकाश पांडेय
राज्य विधान सभा 2013 के दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिज़ोरम से आये चुनावी नतीजों में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो चौंकाने वाला हो, सिवाय इसके की राजनीतिक विश्लेषकों और चाटुकार संस्कृति