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Mar 04, 2016, 9:13 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल, सरकार चाहे जिसकी हो, जब भी बजट पेश होता है, लगता है सब कुछ कितना हसीन व अच्छा है. संसद में नेताओं का भाषण, सत्ता पक्ष की तालियां, टीवी चैनलों पर जानकारों की बहसें, अखबारों की हेडिंगे और व्या
Jun 01, 2011, 1:52 am    by : जय प्रकाश पांडेय
यह देश, यहां का माहौल, सब कुछ जल्दी से पा लेने और जल्दी से भूल जाने की मानसिकता, और नहीं तो जैसा है वैसा स्वीकार कर लेने की हमारी प्रवृत्ति से ही हर्षद मेहता, तेलगी, बलवा, राजा, रादिया और स्पीक एशिय