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Dec 28, 2015, 6:27 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारी संसद न केवल जनआकांक्षाओं का प्रतीक है, बल्कि वहां बने नीति-नियम देश की दशा और दिशा तय करते हैं. संविधान दिवस के नाम पर जब संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी, तब सभी पक्षों ने सदन की गरिम
Aug 15, 2015, 11:29 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
लाल किला से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर खोखले शब्दों के जो बम गोले फेंके, उसकी तपिश से भज-भज मंडली से जुड़े भक्तजन भले ही प्रभावित हों, पर जिन्होंने भी सीधे या ट
Aug 08, 2015, 5:15 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारे माननीय सांसद जिस काम के लिए चुने गये हैं, उसे छोड़ कर बाकी सब कुछ कर रहे. मीडिया पर बयान जारी है, मुस्करा कर एक -दूसरे का स्वागत जारी है, दैनिक भत्ता जारी है, सरकारी महकमों में पैरवी जारी है,
Mar 15, 2015, 1:32 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
यह कौन सा समाज है, जिसमें हम रह रहे हैं, और यह कौन सा भारत है, जिसमें 'स्त्री' एक शरीर से इतर कुछ और नहीं? आखिर वह कौन सी वजह है कि महिलाओं को लेकर आम से लेकर खास पुरुषों की सोच केवल 'मर्द' रूपी
Jun 14, 2011, 2:03 am    by : जय प्रकाश पांडेय
इतिहास गवाह है कि राज्य सत्ता तभी तक टिकती है, जब तक जनता का भरोसा उस पर है. बड़े से बड़ा तानाशाह भी आधुनिक दौर में अपना शासन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव का सहारा लेता है. हिटलर से लेकर, परवेज़ मु