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Nov 21, 2015, 5:36 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
नीतीश कुमार ने जब पांचवीं बार राजनीतिक रूप से जागरूक कहे जाने वाले सुबे बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो उनके चेहरे पर वह तेज नहीं था, जो जीत की खुशी का होना चाहिए. लालू के परिवारवाद ने उनके
Aug 14, 2011, 3:32 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
किसी देश के जीवन में 65 सालों की उम्र कोई खास मायने नहीं रखती, पर उसका महत्त्व तब काफी बढ़ जाता है जब यह उम्र खुली हवा में, अपनी धरती, अपना आसमान, अपने सपने, अपने अरमान और अपनी उम्मीदों के साथ हासिल क
May 14, 2011, 4:43 am    by : जय प्रकाश पांडेय
'ये जो पब्लिक है, ये सब जानती है, ये जो पब्लिक है...' संभवत: 70 के दशक में लोगों की जबान पर चढ़ चुके इस गाने की आगे की लाइनें हैं- 'हीरे-मोती तुमने छिपाए, कुछ हम लोग न बोले, पर आटा-चावल भी छिपा तो भूखो