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Aug 15, 2015, 11:29 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
लाल किला से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर खोखले शब्दों के जो बम गोले फेंके, उसकी तपिश से भज-भज मंडली से जुड़े भक्तजन भले ही प्रभावित हों, पर जिन्होंने भी सीधे या ट
Aug 15, 2014, 12:57 pm    by : जय प्रकाश पांडेय
लाल किले के अपने पहले सम्बोधन में बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईमानदार दिखने, देश के लिए कुछ करने और सरकार को जनता की सक्रिय भागीदारी से जोड़ने के लिए तमाम बातें कहीं. स्वच्छता, सफाई, युवा
Aug 15, 2013, 11:08 am    by : जय प्रकाश पांडेय
आज 'लोक' पर 'तंत्र' हावी है. नेता, राजनेता बन 'सेवक' से 'स्वामी' की मुद्रा में हैं, जिन्होंने सियासत को 'सेवा' की बजाय 'सत्ता' के उस प्रतिष्ठान्न में बदल दिया है, जहां नैतिकता, क
Aug 15, 2012, 11:24 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आखिर क्या हो गया हमारे लोकतंत्र को ? किसकी नजर लग गयी हमें? कहीं तो कुछ ऐसा है, जो हमसे हमारे आजादी के मायने छीन रहा है, हम वह हासिल नहीं कर पा रहे जिसका सपना अपने को कुरबान करते वक्त हमारे स्वतंत्
Aug 14, 2011, 3:32 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
किसी देश के जीवन में 65 सालों की उम्र कोई खास मायने नहीं रखती, पर उसका महत्त्व तब काफी बढ़ जाता है जब यह उम्र खुली हवा में, अपनी धरती, अपना आसमान, अपने सपने, अपने अरमान और अपनी उम्मीदों के साथ हासिल क