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Jul 04, 2017, 5:27 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
'एक राष्ट्र, एक बाजार और एक कर' के लुभावने नारे के बीच देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का दावा करने वाला गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी कि जीएसटी एक जुलाई को आधी रात से ही लागू हो गया है, प
Jan 22, 2017, 6:36 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अमेरिका की पहचान विविधता है. इसे विचारधारा का संशय कहें या ऐतिहासिक बदलाव की घड़ी, पर अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के शपथ लेने के साथ ही दुनिया सहम सी गई है. खुद अमेरिकी भ
Nov 11, 2016, 6:13 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
डोनाल्ड ट्रंप अब अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति हैं. वह ट्रंप, जो अमेरिका के सबसे रईस लोगों में से एक हैं, पर जिनकी तुनकमिजाजी को मीडिया में इस तरह प्रचारित किया गया कि उनकी छवि एक खलनायक की स
Oct 17, 2016, 12:31 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय सदियों तक विदेशी आक्रमण और अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद का शिकार रहा है, इसलिए विशिष्टता की सोच वालों से हम अभी भी कतराते हैं. हमारी सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' वाली है. रूस ने भी अपनी तमाम विस्तार
Oct 02, 2016, 1:12 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
बापू के जिन सबल के सिद्धांतों आगे सर्वशक्तिमान ब्रिटीश साम्राज्य तक ने घुटने टेक दिए थे, उन्हीं के विरोध में सत्ता पाते ही भगवा मंडली ने अपना खेल शुरू कर दिया है. आज हर उस चीज को तरजीह दी जा रही,
Oct 13, 2015, 5:10 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हकीकत यह है कि कानून की नजर में बड़े से बड़े अपराधी का दोष जानने के लिए पुलिस और सतर्कता एजेंसियों द्वारा पूछताछ के लिए उपयोग में लाया जाने वाला 'लाई डिटेक्टर टेस्ट' भी बिना अदालत की अनुमति और
Sep 24, 2015, 4:47 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
बिहार में विधान सभा चुनाव की सरगर्मी अपने शबाब पर है. वैसे तो किसी भी राज्य में विधानसभा का चुनाव उस राज्य के निवासियों के भविष्य से जुड़ा स्थानीय चुनाव होता है, पर जब से नरेन्द्र मोदी की अगुआई
Aug 22, 2015, 3:08 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अगस्त जाने वाला है, पर मन में आजादी, उसकी अर्थवत्ता, उसकी हाकीकत, उसे लेकर दी गई कुर्बानियां, और उसके मिथ से जुड़े विचारों का बवंडर है कि थमता ही नहीं. अगस्त है यह, उत्सवों का माह. अपने अतीत पर, आजा
Jul 18, 2015, 2:32 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
ग्रीस के जिस आर्थिक संकट ने समूचे यूरोप और अमेरिका को हिला रखा है, इसकी असली वजह आखिर क्या है? और भारत पर इस संकट का क्या असर होगा, पर बतौर पत्रकार अपनी तीखी नजर तो थी, पर अपने पाठकों को सरल भाषा मे
Jul 13, 2015, 11:49 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
सरकार की योजनाओं से किसी को गुरेज नहीं, पर तब, जब देश की बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाएं. जरूरतें पूरी कर आप जश्न मनाइये. डिजिटल इंडिया से ज्यादा जरूरी दूसरे काम हो सकते हैं, 'सबको भोजन इंडिया', &