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Oct 08, 2014, 1:50 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर किसी के जीवन में कुछ घटनायें, कुछ बातें होती हैं, जो न केवल आपको झकझोर कर रख देती हैं, बल्कि जिनसे आपके जीवन की दिशा ही बदल जाती है. रत्‍नाकर डाकू से 'महर्षि बाल्मिकी' बनने और मोहन दास करमचं
Apr 05, 2012, 6:27 am    by : जय प्रकाश पांडेय
किसी दौर में देश के भले और लोकतंत्र की मजबूती के लिए करोडो -अरबों रूपये का नुकसान सहने वाले स्वाधीनता सेनानी रामनाथ गोयनका के इस अखबार के मौजूदा कर्णधारों ने सेना की एक छोटी सी टुकड़ी की रूटीन
Jun 22, 2011, 5:28 am    by : जय प्रकाश पांडेय
आजकल टेलीविजन के समाचार चैनलों पर सरकारी एड का बोलबाला है, जिसमें देश और देशवासी लहलहाते, खुशहाल और प्रसन्नचित्त दिखाई देते हैं. यहां केवल टेलीविज़न की बात इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इनमें गीत-
Jun 07, 2011, 5:36 am    by : जय प्रकाश पांडेय
यह देश गावों का, गरीबों का, प्रतीकों का देश है. इक्कीसवीं सदी में भी पेड़, नदियाँ, और पत्थर देशवासियों की आस्था के प्रतीक हैं. अपना भला हो, इसके लिए वह निर्जीव जगहों पर भी एक लोटा जल चढ़ा देता है. प