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Apr 16, 2018, 11:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
एक देश और उसके नागरिक के रूप में यह देखना कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि बलात्कार जैसे घातक अपराध का भी जातीय-धार्मिक विभाजन हो रहा. उन्नाव हो या कठुआ, दिल्ली हो या पटना, निर्भया हो या आसिफा, बेटिया
Dec 18, 2017, 12:37 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
'क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं...', वैसे तो यह पंक्तियां कही थीं, भाजपा के शीर्ष पुरूष अटल विहारी वाजपेयी ने पर यह राहुल गांधी पर सटीक बैठती है. राहुल अंततः कांग्रेस अध्यक्ष
Nov 14, 2017, 6:56 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
यह ठीक है कि अमेरिका इस्लामिक स्टेट या बाहर के आतंकियों से निबटने में सक्षम है, पर वह घरेलू हथियार लॉबी के हाथों पड़ गए लोगों की सनक का शिकार होने से कैसे बचेगा. रंगभेदी हिंसा या कहीं भी अचानक ग
Jul 11, 2017, 6:19 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारे देश में जनसंख्या की वृद्धि में धर्म, जाति, शिक्षा, सभ्यता, वर्ग, संस्कार सबकी अपनी-अपनी भूमिका है. धर्म के अलंबरदार, अनुयाइयों की गिनती, तो सियासतबाज इसे वोट की ताकत से जोड़कर देखते हैं. यही
Jul 04, 2017, 5:27 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
'एक राष्ट्र, एक बाजार और एक कर' के लुभावने नारे के बीच देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का दावा करने वाला गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी कि जीएसटी एक जुलाई को आधी रात से ही लागू हो गया है, प
Feb 20, 2017, 3:49 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आम बजट पर संसद में अभी बहस पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. बजट सत्र काफी लंबा चलता है. फिर इस साल तो उसमें रेल बजट भी शामिल है. हालांकि बजट हर साल आता है, पर क्या वाकई आम बजट का आम नागरिकों से कोई मतलब होत
Jan 22, 2017, 6:36 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अमेरिका की पहचान विविधता है. इसे विचारधारा का संशय कहें या ऐतिहासिक बदलाव की घड़ी, पर अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के शपथ लेने के साथ ही दुनिया सहम सी गई है. खुद अमेरिकी भ
Nov 11, 2016, 6:13 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
डोनाल्ड ट्रंप अब अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति हैं. वह ट्रंप, जो अमेरिका के सबसे रईस लोगों में से एक हैं, पर जिनकी तुनकमिजाजी को मीडिया में इस तरह प्रचारित किया गया कि उनकी छवि एक खलनायक की स
Oct 17, 2016, 12:31 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय सदियों तक विदेशी आक्रमण और अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद का शिकार रहा है, इसलिए विशिष्टता की सोच वालों से हम अभी भी कतराते हैं. हमारी सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' वाली है. रूस ने भी अपनी तमाम विस्तार
Oct 02, 2016, 1:12 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
बापू के जिन सबल के सिद्धांतों आगे सर्वशक्तिमान ब्रिटीश साम्राज्य तक ने घुटने टेक दिए थे, उन्हीं के विरोध में सत्ता पाते ही भगवा मंडली ने अपना खेल शुरू कर दिया है. आज हर उस चीज को तरजीह दी जा रही,