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Nov 21, 2015, 5:36 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
नीतीश कुमार ने जब पांचवीं बार राजनीतिक रूप से जागरूक कहे जाने वाले सुबे बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो उनके चेहरे पर वह तेज नहीं था, जो जीत की खुशी का होना चाहिए. लालू के परिवारवाद ने उनके
Aug 22, 2015, 3:08 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अगस्त जाने वाला है, पर मन में आजादी, उसकी अर्थवत्ता, उसकी हाकीकत, उसे लेकर दी गई कुर्बानियां, और उसके मिथ से जुड़े विचारों का बवंडर है कि थमता ही नहीं. अगस्त है यह, उत्सवों का माह. अपने अतीत पर, आजा
Aug 14, 2011, 3:32 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
किसी देश के जीवन में 65 सालों की उम्र कोई खास मायने नहीं रखती, पर उसका महत्त्व तब काफी बढ़ जाता है जब यह उम्र खुली हवा में, अपनी धरती, अपना आसमान, अपने सपने, अपने अरमान और अपनी उम्मीदों के साथ हासिल क
Jun 14, 2011, 2:03 am    by : जय प्रकाश पांडेय
इतिहास गवाह है कि राज्य सत्ता तभी तक टिकती है, जब तक जनता का भरोसा उस पर है. बड़े से बड़ा तानाशाह भी आधुनिक दौर में अपना शासन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव का सहारा लेता है. हिटलर से लेकर, परवेज़ मु
May 14, 2011, 4:43 am    by : जय प्रकाश पांडेय
'ये जो पब्लिक है, ये सब जानती है, ये जो पब्लिक है...' संभवत: 70 के दशक में लोगों की जबान पर चढ़ चुके इस गाने की आगे की लाइनें हैं- 'हीरे-मोती तुमने छिपाए, कुछ हम लोग न बोले, पर आटा-चावल भी छिपा तो भूखो
Apr 25, 2011, 1:49 am    by : आशुतोष
सत्ता कहने को लोकतांत्रिक है लेकिन फैसले चंद लोगों के हाथ में सिमट कर रह गए हैं। पार्टी सिस्टम की वजह से राजनीतिक दलों में लोकतंत्र पूरी तरह से गायब है। कांग्रेस में वही होता है जो सोनिया गांध