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Aug 15, 2013, 11:08 am    by : जय प्रकाश पांडेय
आज 'लोक' पर 'तंत्र' हावी है. नेता, राजनेता बन 'सेवक' से 'स्वामी' की मुद्रा में हैं, जिन्होंने सियासत को 'सेवा' की बजाय 'सत्ता' के उस प्रतिष्ठान्न में बदल दिया है, जहां नैतिकता, क