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Apr 09, 2018, 10:09 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
विरोध का यह संस्थागत रूप राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान को लेकर बेहद खतरनाक है. संसद का यह पूरा सत्र बिना कामकाज के खत्म हुआ. हम सबको यह समझने की जरूरत है कि देश बचेगा, बचा रहेगा, तभी मिलेगा किसी
Feb 20, 2017, 3:49 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आम बजट पर संसद में अभी बहस पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. बजट सत्र काफी लंबा चलता है. फिर इस साल तो उसमें रेल बजट भी शामिल है. हालांकि बजट हर साल आता है, पर क्या वाकई आम बजट का आम नागरिकों से कोई मतलब होत
Apr 28, 2016, 11:17 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश में अपने आपको सर्वोपरि समझने वाले हमारे माननीय जनप्रतिनिधियों को कायदे से देश में लागू कानूनों का पालन करना चाहिए, पर होता इसका उल्टा है. या तो मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए या फिर अप
Mar 04, 2016, 9:13 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल, सरकार चाहे जिसकी हो, जब भी बजट पेश होता है, लगता है सब कुछ कितना हसीन व अच्छा है. संसद में नेताओं का भाषण, सत्ता पक्ष की तालियां, टीवी चैनलों पर जानकारों की बहसें, अखबारों की हेडिंगे और व्या
Jan 26, 2016, 2:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल छब्बीस जनवरी आती है, और इसके साथ ही देश को अवसर मिलता है, उन लोगों को, स्वतंत्रता सेनानियों को, कर्णधारों को याद करने का, जिनकी बदौलत न केवल हमें आजादी मिली, बल्कि जिनके चलते हमें दुनिया का
Dec 28, 2015, 6:27 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारी संसद न केवल जनआकांक्षाओं का प्रतीक है, बल्कि वहां बने नीति-नियम देश की दशा और दिशा तय करते हैं. संविधान दिवस के नाम पर जब संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी, तब सभी पक्षों ने सदन की गरिम
Aug 15, 2015, 11:29 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
लाल किला से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर खोखले शब्दों के जो बम गोले फेंके, उसकी तपिश से भज-भज मंडली से जुड़े भक्तजन भले ही प्रभावित हों, पर जिन्होंने भी सीधे या ट
Aug 08, 2015, 5:15 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारे माननीय सांसद जिस काम के लिए चुने गये हैं, उसे छोड़ कर बाकी सब कुछ कर रहे. मीडिया पर बयान जारी है, मुस्करा कर एक -दूसरे का स्वागत जारी है, दैनिक भत्ता जारी है, सरकारी महकमों में पैरवी जारी है,
Mar 15, 2015, 1:32 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
यह कौन सा समाज है, जिसमें हम रह रहे हैं, और यह कौन सा भारत है, जिसमें 'स्त्री' एक शरीर से इतर कुछ और नहीं? आखिर वह कौन सी वजह है कि महिलाओं को लेकर आम से लेकर खास पुरुषों की सोच केवल 'मर्द' रूपी
Jun 14, 2011, 2:03 am    by : जय प्रकाश पांडेय
इतिहास गवाह है कि राज्य सत्ता तभी तक टिकती है, जब तक जनता का भरोसा उस पर है. बड़े से बड़ा तानाशाह भी आधुनिक दौर में अपना शासन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव का सहारा लेता है. हिटलर से लेकर, परवेज़ मु