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Nov 14, 2017, 6:56 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
यह ठीक है कि अमेरिका इस्लामिक स्टेट या बाहर के आतंकियों से निबटने में सक्षम है, पर वह घरेलू हथियार लॉबी के हाथों पड़ गए लोगों की सनक का शिकार होने से कैसे बचेगा. रंगभेदी हिंसा या कहीं भी अचानक ग
Nov 11, 2016, 6:13 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
डोनाल्ड ट्रंप अब अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति हैं. वह ट्रंप, जो अमेरिका के सबसे रईस लोगों में से एक हैं, पर जिनकी तुनकमिजाजी को मीडिया में इस तरह प्रचारित किया गया कि उनकी छवि एक खलनायक की स
Jun 19, 2016, 6:11 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ा वर्ग आख़िरी पंक्ति के वोटर माने जाते हैं, तो ब्राह्मण पहली पंक्ति के. अति पिछड़ा वर्ग के लोगों की संख्या ब्राह्मणों की तुलना में काफी कम और वे एकजुट भी नहीं है. उनकी
Apr 09, 2016, 10:57 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
मध्य प्रदेश में देश के उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायाधीश एक मंथन शिविर कर रहे हैं, जिसमें समाज के दूसरे हिस्से के लोग भी शिरकत करेंगे. दरअसल, हमारे न्यायिक ढांचे में यह एक नए तरह की पहल है, जि
Jan 26, 2016, 2:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल छब्बीस जनवरी आती है, और इसके साथ ही देश को अवसर मिलता है, उन लोगों को, स्वतंत्रता सेनानियों को, कर्णधारों को याद करने का, जिनकी बदौलत न केवल हमें आजादी मिली, बल्कि जिनके चलते हमें दुनिया का
Apr 14, 2015, 2:17 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
प्रधानमंत्री जी! छोटे लोगों की जरूरतें भी छोटी होती हैं और वह संतुष्ट भी बहुत कम में हो जाते हैं. बड़े लोगों के लिए आप जो भी करना चाहते हैं करिए, पर छोटों को भूलिए मत...और यह भी मत भूलिए कि जब किसान अ
Aug 15, 2012, 11:24 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आखिर क्या हो गया हमारे लोकतंत्र को ? किसकी नजर लग गयी हमें? कहीं तो कुछ ऐसा है, जो हमसे हमारे आजादी के मायने छीन रहा है, हम वह हासिल नहीं कर पा रहे जिसका सपना अपने को कुरबान करते वक्त हमारे स्वतंत्
Jun 22, 2011, 5:28 am    by : जय प्रकाश पांडेय
आजकल टेलीविजन के समाचार चैनलों पर सरकारी एड का बोलबाला है, जिसमें देश और देशवासी लहलहाते, खुशहाल और प्रसन्नचित्त दिखाई देते हैं. यहां केवल टेलीविज़न की बात इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इनमें गीत-
Jun 01, 2011, 1:52 am    by : जय प्रकाश पांडेय
यह देश, यहां का माहौल, सब कुछ जल्दी से पा लेने और जल्दी से भूल जाने की मानसिकता, और नहीं तो जैसा है वैसा स्वीकार कर लेने की हमारी प्रवृत्ति से ही हर्षद मेहता, तेलगी, बलवा, राजा, रादिया और स्पीक एशिय
May 14, 2011, 4:43 am    by : जय प्रकाश पांडेय
'ये जो पब्लिक है, ये सब जानती है, ये जो पब्लिक है...' संभवत: 70 के दशक में लोगों की जबान पर चढ़ चुके इस गाने की आगे की लाइनें हैं- 'हीरे-मोती तुमने छिपाए, कुछ हम लोग न बोले, पर आटा-चावल भी छिपा तो भूखो