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Aug 15, 2013, 11:08 am    by : जय प्रकाश पांडेय
आज 'लोक' पर 'तंत्र' हावी है. नेता, राजनेता बन 'सेवक' से 'स्वामी' की मुद्रा में हैं, जिन्होंने सियासत को 'सेवा' की बजाय 'सत्ता' के उस प्रतिष्ठान्न में बदल दिया है, जहां नैतिकता, क
Aug 15, 2012, 11:24 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
आखिर क्या हो गया हमारे लोकतंत्र को ? किसकी नजर लग गयी हमें? कहीं तो कुछ ऐसा है, जो हमसे हमारे आजादी के मायने छीन रहा है, हम वह हासिल नहीं कर पा रहे जिसका सपना अपने को कुरबान करते वक्त हमारे स्वतंत्