Sunday, 17 November 2019  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 
खोजें
Apr 09, 2018, 10:09 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
विरोध का यह संस्थागत रूप राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान को लेकर बेहद खतरनाक है. संसद का यह पूरा सत्र बिना कामकाज के खत्म हुआ. हम सबको यह समझने की जरूरत है कि देश बचेगा, बचा रहेगा, तभी मिलेगा किसी
May 08, 2016, 6:05 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय जनता पार्टी आक्रामक है, न केवल राष्ट्रवाद के मसले पर बल्कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी. अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की डील पर इटली की कोर्ट से आए फैसले ने उसे ऐसा हथियार मुहैय
Nov 21, 2015, 5:36 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
नीतीश कुमार ने जब पांचवीं बार राजनीतिक रूप से जागरूक कहे जाने वाले सुबे बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो उनके चेहरे पर वह तेज नहीं था, जो जीत की खुशी का होना चाहिए. लालू के परिवारवाद ने उनके
Sep 24, 2015, 4:47 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
बिहार में विधान सभा चुनाव की सरगर्मी अपने शबाब पर है. वैसे तो किसी भी राज्य में विधानसभा का चुनाव उस राज्य के निवासियों के भविष्य से जुड़ा स्थानीय चुनाव होता है, पर जब से नरेन्द्र मोदी की अगुआई
Aug 22, 2015, 3:08 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अगस्त जाने वाला है, पर मन में आजादी, उसकी अर्थवत्ता, उसकी हाकीकत, उसे लेकर दी गई कुर्बानियां, और उसके मिथ से जुड़े विचारों का बवंडर है कि थमता ही नहीं. अगस्त है यह, उत्सवों का माह. अपने अतीत पर, आजा
Aug 15, 2015, 11:29 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
लाल किला से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर खोखले शब्दों के जो बम गोले फेंके, उसकी तपिश से भज-भज मंडली से जुड़े भक्तजन भले ही प्रभावित हों, पर जिन्होंने भी सीधे या ट
Aug 08, 2015, 5:15 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारे माननीय सांसद जिस काम के लिए चुने गये हैं, उसे छोड़ कर बाकी सब कुछ कर रहे. मीडिया पर बयान जारी है, मुस्करा कर एक -दूसरे का स्वागत जारी है, दैनिक भत्ता जारी है, सरकारी महकमों में पैरवी जारी है,
Apr 08, 2015, 3:51 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
देश की राजधानी दिल्ली में फिलहाल घोषणाओं का मौसम है. वादों, उद्घाटनों और बड़बोलेपन के दौर ने सियासी पारे को अच्छा-खासा उपर चढ़ा दिया है. यह अलग बात है कि प्रकृति अभी दिल्लीवासियों पर मेहरबान है औ
Apr 25, 2011, 1:49 am    by : आशुतोष
सत्ता कहने को लोकतांत्रिक है लेकिन फैसले चंद लोगों के हाथ में सिमट कर रह गए हैं। पार्टी सिस्टम की वजह से राजनीतिक दलों में लोकतंत्र पूरी तरह से गायब है। कांग्रेस में वही होता है जो सोनिया गांध