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Apr 16, 2018, 11:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
एक देश और उसके नागरिक के रूप में यह देखना कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि बलात्कार जैसे घातक अपराध का भी जातीय-धार्मिक विभाजन हो रहा. उन्नाव हो या कठुआ, दिल्ली हो या पटना, निर्भया हो या आसिफा, बेटिया
Apr 09, 2018, 10:09 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
विरोध का यह संस्थागत रूप राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान को लेकर बेहद खतरनाक है. संसद का यह पूरा सत्र बिना कामकाज के खत्म हुआ. हम सबको यह समझने की जरूरत है कि देश बचेगा, बचा रहेगा, तभी मिलेगा किसी
Jul 11, 2017, 6:19 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारे देश में जनसंख्या की वृद्धि में धर्म, जाति, शिक्षा, सभ्यता, वर्ग, संस्कार सबकी अपनी-अपनी भूमिका है. धर्म के अलंबरदार, अनुयाइयों की गिनती, तो सियासतबाज इसे वोट की ताकत से जोड़कर देखते हैं. यही
Oct 17, 2016, 12:31 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय सदियों तक विदेशी आक्रमण और अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद का शिकार रहा है, इसलिए विशिष्टता की सोच वालों से हम अभी भी कतराते हैं. हमारी सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' वाली है. रूस ने भी अपनी तमाम विस्तार
May 08, 2016, 6:05 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय जनता पार्टी आक्रामक है, न केवल राष्ट्रवाद के मसले पर बल्कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी. अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की डील पर इटली की कोर्ट से आए फैसले ने उसे ऐसा हथियार मुहैय
Apr 09, 2016, 10:57 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
मध्य प्रदेश में देश के उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायाधीश एक मंथन शिविर कर रहे हैं, जिसमें समाज के दूसरे हिस्से के लोग भी शिरकत करेंगे. दरअसल, हमारे न्यायिक ढांचे में यह एक नए तरह की पहल है, जि
Mar 04, 2016, 9:13 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल, सरकार चाहे जिसकी हो, जब भी बजट पेश होता है, लगता है सब कुछ कितना हसीन व अच्छा है. संसद में नेताओं का भाषण, सत्ता पक्ष की तालियां, टीवी चैनलों पर जानकारों की बहसें, अखबारों की हेडिंगे और व्या
Feb 07, 2016, 6:09 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
महबूबा को सरकार बनाने की जल्दबाजी नहीं है, उसकी कुछ वजहें हैं. राज्य और पार्टी को लेकर उनकी सोच अपने पिता से अलग है. कट्टरपंथ, आतंकवाद, भारत, पाकिस्तान और कश्मीरियों पर भी महबूबा की सोच थोड़ी सा
Dec 28, 2015, 6:27 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारी संसद न केवल जनआकांक्षाओं का प्रतीक है, बल्कि वहां बने नीति-नियम देश की दशा और दिशा तय करते हैं. संविधान दिवस के नाम पर जब संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी, तब सभी पक्षों ने सदन की गरिम
Nov 21, 2015, 5:36 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
नीतीश कुमार ने जब पांचवीं बार राजनीतिक रूप से जागरूक कहे जाने वाले सुबे बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो उनके चेहरे पर वह तेज नहीं था, जो जीत की खुशी का होना चाहिए. लालू के परिवारवाद ने उनके