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Dec 18, 2017, 12:37 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
'क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं...', वैसे तो यह पंक्तियां कही थीं, भाजपा के शीर्ष पुरूष अटल विहारी वाजपेयी ने पर यह राहुल गांधी पर सटीक बैठती है. राहुल अंततः कांग्रेस अध्यक्ष
May 08, 2016, 6:05 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
भारतीय जनता पार्टी आक्रामक है, न केवल राष्ट्रवाद के मसले पर बल्कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी. अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की डील पर इटली की कोर्ट से आए फैसले ने उसे ऐसा हथियार मुहैय
Feb 07, 2016, 6:09 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
महबूबा को सरकार बनाने की जल्दबाजी नहीं है, उसकी कुछ वजहें हैं. राज्य और पार्टी को लेकर उनकी सोच अपने पिता से अलग है. कट्टरपंथ, आतंकवाद, भारत, पाकिस्तान और कश्मीरियों पर भी महबूबा की सोच थोड़ी सा
Nov 02, 2015, 5:57 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
शिव सेना के पिछले काफी दिनों से आक्रामक रहे तेवर का लाभ उसे आखिर मिल ही गया और शिव सेना ने मुबंई के उपनगर कल्याण-डोंबीवली निकाय चुनाव में जीत हासिल कर ली. इस चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी और
Sep 24, 2015, 4:47 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
बिहार में विधान सभा चुनाव की सरगर्मी अपने शबाब पर है. वैसे तो किसी भी राज्य में विधानसभा का चुनाव उस राज्य के निवासियों के भविष्य से जुड़ा स्थानीय चुनाव होता है, पर जब से नरेन्द्र मोदी की अगुआई
Sep 08, 2015, 1:19 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
यह अब कोई छिपी बात नहीं है कि एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा का अपना कोई अलग वजूद नहीं, सिवाय इसके कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक राजनीतिक शाखा भर है. संघ ने लाल कृष्ण आडवाणी को किनारे लगा क
Aug 08, 2015, 5:15 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हमारे माननीय सांसद जिस काम के लिए चुने गये हैं, उसे छोड़ कर बाकी सब कुछ कर रहे. मीडिया पर बयान जारी है, मुस्करा कर एक -दूसरे का स्वागत जारी है, दैनिक भत्ता जारी है, सरकारी महकमों में पैरवी जारी है,
Jul 25, 2015, 1:18 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक बिहार पर बहुत मेहरबान हो गए हैं और 25 जुलाई को पटना में उन्होंने राज्य की तरक्की के लिए 3.75 लाख करोड़ रुपए देने की घोषणा कर दी. जबान से किसी को कुछ भी देने में क्या
Jul 05, 2015, 12:22 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
मीडिया अपने तमाम संकटों और स्वार्थों के बावजूद चिकित्सकीय पेशे की तरह समाज को लेकर अपनी जिम्मेदारियों से परे नहीं हुआ है, इसीलिए देश में उसे हमेशा से लोकतंत्र के चौथे खंभे के रूप में याद किया
May 20, 2015, 11:06 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अपनी 56 दिनों की बेहद चर्चित और निजी छुट्टी बिताकर जब राहुल गांधी लौटे, तो पहले हफ्ते में ही उन्होंने न केवल दबे कुचले विपक्ष को एक तरह से अपनी आवाज दी, बल्कि सत्तासीन भाजपा और प्रधानमंत्री नरें