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Jan 26, 2016, 2:07 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
हर साल छब्बीस जनवरी आती है, और इसके साथ ही देश को अवसर मिलता है, उन लोगों को, स्वतंत्रता सेनानियों को, कर्णधारों को याद करने का, जिनकी बदौलत न केवल हमें आजादी मिली, बल्कि जिनके चलते हमें दुनिया का
May 13, 2015, 12:53 pm    by : जय प्रकाश पाण्डेय
अजीब प्रजातंत्र है हमारा भी और चमत्कारिक न्याय व्यवस्था. आपके पास पैसे हैं, रसूख है, कानून की अपने हिसाब से व्याख्या करने वाला दिमागदार वकील है, तो फिर आप जैसे चाहो इससे खेल सकते हो. कहने को तो ह
Jun 14, 2011, 2:03 am    by : जय प्रकाश पांडेय
इतिहास गवाह है कि राज्य सत्ता तभी तक टिकती है, जब तक जनता का भरोसा उस पर है. बड़े से बड़ा तानाशाह भी आधुनिक दौर में अपना शासन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव का सहारा लेता है. हिटलर से लेकर, परवेज़ मु
May 14, 2011, 4:43 am    by : जय प्रकाश पांडेय
'ये जो पब्लिक है, ये सब जानती है, ये जो पब्लिक है...' संभवत: 70 के दशक में लोगों की जबान पर चढ़ चुके इस गाने की आगे की लाइनें हैं- 'हीरे-मोती तुमने छिपाए, कुछ हम लोग न बोले, पर आटा-चावल भी छिपा तो भूखो
Mar 26, 2011, 3:45 am    by : राधेश्याम तिवारी
इस बार अप्रत्याशित बरसात ने प्रदेश के भ्रष्टाचार को धो पोछ कर जनता के सामने रख दिया है और साबित कर दिया है कि प्रदेश के नौकरशाह अभियंता और नेताओं ने किस प्रकार विकास को दीमक की तरह चाट कर जनता क