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Jan 04, 2015, 5:15 am    by : जय प्रकाश पाण्डेय
होना तो यह चाहिए था कि हर बदलने वाले दिन के साथ इनसान बेहतरी की तरफ बढ़ता, पर हो इसका उलटा रहा है. 'वसुधैव कुटुम्बकम' का दर्शन मानने वाले देश के नागरिक अब मानव मात्र, सम्पूर्ण विश्व तो दूर, अपने