Sunday, 20 September 2020  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 
खोजें
Sep 12, 2020, 18:02 pm    by : त्रिभुवन
अग्निवेश एक अलग तरह के साधु और एक विलक्षण तरह कर सामाजिक नेता थे। उनके व्यक्तित्व में सम्मोहन और उनकी भाषा में एक आज था। वे विवादास्पद भी थे। वे विवादों को निमंत्रित भी करते थे। लेकिन सच में व
Jun 24, 2020, 16:05 pm    by : त्रिभुवन
न दिनों दुनिया भर के अख़बार हर मोबाइल में घूम रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि हर देश कलह, वेदना, आँसू और असंतोष के अनचीन्हे रास्तों पर है। हर देश अपने भीतर एक अघोषित गृहयुद्ध युद्ध लड़ रहा है। अख़बार में,
May 29, 2019, 18:13 pm    by : त्रिभुवन
यह बहस पूरे देश में है कि ईवीएम हैक हो रही है। मुझे भी लगता है कि ईवीएम हैक हो रही है। हारे हुए नेताओं, उनके दलों, उनके कार्यकर्ताओं और उनके प्रशंसकों को वाकई लग रहा है कि ईवीएम हैक हुए बिना इतनी
Jul 24, 2018, 16:44 pm    by : त्रिभुवन
यह एक ख़तरनाक़ समानता है कि देश में निरीह मुस्लिमों के मॉब लिंचिंग मर्डर, ज्ञान-विज्ञान और विवेकवाद की बात करने वालों की हत्याएं और उन पर हमले और सुकुमार और असहाय बालिकाओं से नृशंस बलात्कार की घ
Jul 21, 2018, 11:57 am    by : त्रिभुवन
आपके पास चार साल पहले वोट थे 336 और अब रह गए हैं 325 वोट। और अविश्वास भी आपके ही सहयोगी लेकर आये। क्या आप सिर्फ़ नेहरू-गांधी परिवार को कोस-कोस कर ही अपना शासन चलाएंगे? इस देश को एक जिम्मेदार भाजपा, एक
May 31, 2018, 13:48 pm    by : त्रिभुवन
पत्रकारिता का तो प्रमुख कर्तव्य हो गया है कि वह नायकत्व को स्वीकार करे और उसकी पूजा करे। उसकी छत्रछाया में समाचार पत्रों का स्थान सनसनी ने और विवेकसम्मत मत का विवेकहीन भावावेश ने ले लिया है।
May 16, 2018, 15:40 pm    by : त्रिभुवन
कांग्रेस के पास न तो कूटनीति दिखाई देती है और न शूटनीति और हूटनीति। इस सबमें भाजपा नेता और उनका विशालकाय कैडर बहुत ही माहिर है। कांग्रेस के पास न तो वैचारिक तपिश दिखाई देती है और न ही आंदोलन की
Jun 07, 2017, 5:57 am    by : त्रिभुवन
आप 15 अगस्त 1947 से ऐसा का ऐसा कर रहे हो। आपकी सत्ता की दुकान वही की वही रहती है और हर पांच, दस या पंद्रह साल में एक बार उस दुकान का बोर्ड बदलते हो। सत्ता की आपकी यह दुकान किसी राज्य में किसी के नाम से च
May 18, 2017, 19:09 pm    by : जनता जनार्दन संवाददाता
ऐसी दास्तान दुनिया के किसी देश में नहीं दिख रही थी कि अपने ही नागरिकों को अपने ही देश में गुस्ताख़ निगाही से देखा जा रहा था और अपने ही स्वर में स्वर साधने वाले आपराधिक वैताल परमप्रिय हो रहे थे। इ
May 06, 2017, 7:33 am    by : त्रिभुवन
अंतत: भक्त ने माहौल और अपनी कायरता की गहराई को भांप कर गुंडे को शांति वार्ता के लिए निमंत्रण दिया और इसे महान् शांति प्रस्ताव बताया। इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार हुआ और सब लोगों ने कहा कि