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Dec 01, 2020, 18:31 pm    by : अमिय पाण्डेय
वह मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर तथा पूजा आदि की प्रचलित अवधारणा से बिल्कुल भिन्न विचार रखते थे। उनका कहना था कि पत्थरों, ईंटो से निर्मित देवालयों में यदि विश्वास चिपका तो सर्वनाश है। 29 नवम्बर 1992 को उ