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चंदौली: खण्डवारी ग्रुप चहनियां ने पीएम रिलीफ फण्ड में सहायता राशि के रूप में दिया 1 लाख  अमिय पाण्डेय ,  Apr 02, 2020
चंदौली: कोरोना महामारी के बीच राहत भरी खबर सामने आ रही है जहा एक ओर  महामारी से लोग परेशान है यह चिंता का विषय तो  है ही ! लेकिन इससे निपटने के लिए तमाम सेलिब्रेटी, उधोग जगत, शिक्षा जगत, राजनीती क्षेत्र या मीडिया के लोगो ने पीएम रिलीफ फण्ड में दान किया जिससे जरुरतमंदो की सेवा की जा सके.चंदौली जनपद की अगर बाते करे तो पीएम रिलीफ फण्ड में खण्डवारी देवी संस्थान ने 1 लाख रूपये की सहायता राशि दी है. ....  समाचार पढ़ें
जरूरतमंदों के लिये आगे आयी बंसन्त शिक्षा समिति ट्रस्ट, जरूरतमंदों राहगीरो को देगी अनाज अमिय पाण्डेय ,  Apr 01, 2020
बंसन्त शिक्षा समिति ट्रस्ट अब राहगीरो को अनाज भी देगी साथ ही जरूरतमन्द लोगो के लिये भी उसके पास अनेकों चीज़े है जिससे वह आसानी से उनतक पहुचा सके ....  समाचार पढ़ें
बंसन्त शिक्षा समिति ट्रस्ट मिर्ज़ापुर आपसे अपील करता है कि....? अमिय पाण्डेय ,  Mar 29, 2020
बंसन्त शिक्षा समिति मिर्जापुर आपसे निम्न अपेक्षाएं रखता है साथ ही अपील करता है कि आप लोग घरों में रहे ....  समाचार पढ़ें
कोरोना हारेगा भारत जीतेगा, कोरोना-कोई रोड पर न निकले: डॉ. आशुतोष कुमार सिंह निदेशक माँ खण्डवारी पीजी कॉलेज अमिय पाण्डेय ,  Mar 29, 2020
कोरोना और उसका कहर इनदिनों तेजी आई बाढ़ जैसे बढ़ रहा और इनके नए नए मामले तेजी से सामने आ रहे है कोरोना को हरा सकते लेकिन अपने घरों में रहकर ....  समाचार पढ़ें
कृपया घरों से बेवजह बाहर न निकलें कोरोना को हराना हम सबकी जिम्मेदारी: प्रबन्धक बसन्त रामनगीना पी.जी.कालेज धराव चन्दौली अमिय पाण्डेय ,  Mar 29, 2020
कोरोना को हराने की हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है इसी को देखते हुये बंसन्त रामनगीना पीजी कालेज भी लोगो से अपील किया ....  समाचार पढ़ें
अगर आप कोरोना से बचाव चाहते हैं तो सैनेटाइजर और मास्क नहीं? जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 14, 2020
दुनिया में कोरोना वायरस की दहशत के बीच उससे बचाव के पहलुओं पर जोर दिया जाने लगा है. संक्रमण के खतरे को देखते हुए सैनेटाइजर या साबुन के फायदे गिनाए जाने लगे हैं. उससे आगे बढ़कर अब इस बात की सलाह दी जा रही है कि सैनेटाइजर या साबुन में ज्यादा कारगर कौन है ? ....  समाचार पढ़ें
कोरोना वायरस से डरे नही, बल्कि सफाई पर दे ध्यान जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 13, 2020
देश मे कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है और यूपी में भी कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं इसी को लेकर के सरकार ने एडवाइजरी जारी की है साथ ही कोरोना वायरस से लड़ने हेतु लोगो को जगरूक भी किया जा रहा हैं. ....  समाचार पढ़ें
होली पर इन चीजों का दान करने से जीवन में आएंगी खुशियां ही खुशियां जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 08, 2020
जिन लोगों के दांपत्य जीवन में प्रेम की कमी है उन लोगों के लिए होली पर एक विशेष योग बन रहा है. इस योग में उपाय करने से जीवन में प्रेम की कमी दूर होगी. पति से विवाद की स्थिति है या फिर घर में कलह का माहौल बना रहता है तो इस उपाय को जरूर करना चाहिए. ....  समाचार पढ़ें
बच्चों को स्कूल पहुंचाएगी शारदा, आउट आफ स्कूल वाले बच्चों के लिए चलेगा शारदा अभियान: डीएम चन्दौली अमिय पाण्डेय ,  Mar 04, 2020
परिषदीय विद्यालयों में 'शारदा' स्कूल हर दिन आए कार्यक्रम के तहत शिक्षा को मजबूत किया जायेगा। स्कूलों में छात्र-छात्राएं पंजीकृत तो है, लेकिन स्कूल काम पहुंचते है, ऐसे बच्चों को कार्यक्रम के तहत उपस्थिति बढ़ाई जाएगी। उन बच्चों को भी चिन्हित किया जायेगा, जो स्कूल नहीं आते है। शासन ने पंजीकृत बच्चों को नियमित पढ़ाई कराने, निरंतर अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को उप ....  समाचार पढ़ें
दिल्ली में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया, मरीज की हालत स्थिर जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 02, 2020
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोनावायरस के संक्रमण का पहला मामला सामने आया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी. इसके अलावा तेलंगाना में भी एक अन्य कोरोनावायरस से संक्रमण का मामला सामने आया है. ....  समाचार पढ़ें
देश मना रहा है रंगों का त्योहार होली, जानें क्या है परंपरा जय प्रकाश पाण्डेय ,  Mar 21, 2019
रंगों का त्योहार होली आज देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस मौके पर लोग मिलकर, रंग लगाकर एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं. यही नहीं सोशल मीडिया भी बधाई संदेशों से पटा है. होली के त्योहार को धुलंडी नाम से जाना जाता है. धुलंडी पर बच्चे-बड़े सभी मिलकर हंसते-गाते एक दूसरे के साथ होली खेलते हैं. कई जगहों पर गीत-संगीत और भजन के साथ यह त्योहार मनाया जाता है. ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित नीरज वर्मा ,  Nov 15, 2018
ये सब बहुत कुछ आपकी आंतरिक पवित्रता व अध्यात्मिक सामर्थ्य पर निर्भर है । ये स्थान आने वाले दिनों में क्रमशः एक महान शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं करता है । और न ही आम जनमानस की लौकिक और आध्यात्मिक जगत की पारलौकिक लालसाओं की पूर्ति से इनकार करेगा । ....  लेख पढ़ें
रावण को शत शत नमन अमित मौर्या ,  Oct 18, 2018
रावण उत्तम कुल का था. वह वह पुलत्स्कर का नाती और विशेश्रवा का बेटा था. पुलत्स्कर ने विश्व संस्कृत को प्रथम रंगमंच दिया था और ग्रीक नाट्य साहित्य में उसका उल्लेख "पुलित्ज़र" के नाम से मिलता है. रावण ने अपनी बहन के आन के लिए अपना सबकुछ लुटा दिया और सीता को कभी भी अपने हरम में ले जाने के लिए कभी जबरजस्ती नही की वह ज्योतिष का प्रकांड विद्वान् था. उसकी लिखित "रावण संहिता" ज्योतिष विज्ञान की महान कृति है. रावण ने नृत्य और योग के मानक प्रस्तुत किये. प्रायः जो विद्वान् और पढ़े लिखे होते हैं वह कायर होते हैं और निर्णायक मौकों पर आर -पार की लड़ाई या युद्ध से बचते हैं पर रावण विद्वत्ता और साहस का अद्भुत संयोग था. वह महान विद्वान् और प्रतापी योद्धा था. वह रक्षसः आन्दोलन का प्रणेता था. इसीलिए उसे राक्षस कहा गया. हुआ यह कि उस समय इंद्र का राज्य था उसे लोग इंद्र इस लिए कहते थे क्यों कि वह इन्द्रीय हरकतें यानी कि वासना में लिप्त था . इंद्र एक आदिवासी /बनवासी ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
हम हर समुद्रमंथन में अमृत से ले कर अप्सरा तक निगाह तो रखते हैं पर विष नहीं पीना चाहते अमित मौर्या ,  Jul 26, 2018
श्रावण मास का प्रारम्भ हो गया है हर तरफ ओम नमः शिवाय साल भर शराब मांस का भक्षण करने वाले श्रावण मास में इससे दूर रहते है क्या ढकोसला है क्या इसके बाद शिव आराधना नही करते हो श्रावण मास में शराब व मांस का परित्याग लेकिन कोई सुंदरी मिल जाये तो उससे सम्बन्ध बनाने में नही चूकते जिंदा मांस में पूण्य मिलता है क्या शंकर .हमको आज भी शंकर चाहिए ....  लेख पढ़ें
विकृत समाज: भारत में मानव समाज का अस्तित्व डॉ० रवि प्रकाश श्रीवास्तव ,  Jul 26, 2018
सामाजिक व्यवस्था के विकास में वेदों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वर्ण का परिचय ऋग्वेद के 10 वें मंडल से प्रारम्भ होता है, जिसमें यह उदघोषित किया गया है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैष्य और शूद्र सृष्टि के समय परम पुरुष ब्रह्मा के क्रमषः मुख, भुजाओं, जंघा तथा चरणों से प्रकट हुए। विधिवेत्ताओं की दृष्टि में प्रत्येक वर्ण के लिये उत्तरदा ....  लेख पढ़ें
धरती पर चंद्रमा का असरः कभी केवल 18 घंटे का था दिन, बढ़ रही दूरी से जल्द ही 25 घंटे का होगा दिन जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 07, 2018
चंद्रमा के पृथ्वी से दूर जाने के कारण हमारे ग्रह पर दिन लंबे होते जा रहे हैं. एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि 1.4 अरब वर्ष पहले धरती पर एक दिन महज 18 घंटे का होता था. संभव है कि धरती से चंद्रमा की बढ़ती दूरी के चलते आने वाले समय में धरती पर 25 घंटे का दिन होने लगे. ....  लेख पढ़ें
विश्व पर्यावरण दिवस 2018: जब जीवन ही न होगा, तो कहां होंगे हम जय प्रकाश पाण्डेय ,  Jun 05, 2018
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल हमें इस बात का मौका देता है कि हम देखें, समझें और जानें कि प्रकृति के संरक्षण में हर व्यक्ति, परिवार, गांव, शहर, जाति, राज्य, देश और समूचे विश्व की क्या भूमिका है. सारी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. ....  लेख पढ़ें
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