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अंकुरित अनाज के फायदे जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 19, 2017
अंकुरित अनाज को स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। अंकुरित अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होता है इसीलिए हेल्दी रहने के लिए अंकुरित अनाज का सेवन बहुत जरूरी है। आपको अंकुरित अनाज के फायदों के बारे में भी पता होना चाहिए ....  समाचार पढ़ें
भुना हुआ भुट्टा खाने के फायदे आपको हैरत में डाल देंगे जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 19, 2017
भुट्टा बरसात के मौसम में भुट्टे का स्वाद दोगुना हो जाता है. हममें से ज्यादातर लोग स्वाद के लिए ही भुट्टा खाते हैं. हल्की आंच पर पकाया गया भुट्टा बहुत स्वादिष्ट लगता है. लोग इसे नींबू और मसाला लगाकर खाना पसंद करते हैं ....  समाचार पढ़ें
योगी सरकार ने लांच की मदरसों के लिए वेबसाइट, रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 19, 2017
यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की वेब साइट लांच की। अब प्रदेश के करीब 19 हजार मदरसों को अपना रजिस्ट्रेशन इस वेब साइट पर कराना अनिवार्य होगा। ....  समाचार पढ़ें
मोरान में मारवाड़ी महिला सम्मलेन के तत्वाधान में दादी जी का मंगल पाठ,पढ़े रिपोर्ट राजु मिश्रा ,  Aug 19, 2017
गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आगामी 21 अगस्त को एक दिवसीय कार्यक्रमों के साथ श्रीराणी सती दादीजी का भदवा आमावश्या महोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारियां की जा रही है । अखिल भारतिय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की मोरानहाट शाखा के सौजन्य से श्री राधाकृष्ण विवाह भवन में दोपहर 2.30 बजे से पारंपरिक पुजा अर्चना, 3 बजे से भजन गाईका ....  समाचार पढ़ें
नो टेंशन ! जल्द ही मुफ्त में मिलेगी जिम की सुविधा जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 19, 2017
उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) जल्द ही अपने अंतर्गत आने वाले पार्कों में ओपन जिम बनवाकर लोगों की सेहत सुधारने जा रहा है. इसकी जानकारी खुद उत्तरी दिल्ली की मेयर प्रीति अग्रवाल ने दी है ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस चर्चा, उत्तर कांड: कलयुग का पाखंड पूर्व व्याख्यायित जगदीश प्रसाद दुबे ,  Aug 19, 2017
कलियुग में बिना कारण के अभिमान बढा रहेगा. थोडा सा कुछ भी मिल गया अहंकार हो जाता है. मनुष्य यह नहीं सोचता कि यह जो कुछ भी है, प्रभु की कृपा से ही प्राप्त है और प्रलय तक तो जीवित रहना नहीं है. मनुष्य व्यर्थ का अहंकार पाले रहता है किसी को धन, किसी को पद , किसी को बल का किसी को ज्ञान का अहंकार है. सभी कुछ न कुछ अहंकार से ग्रसित जरूर हैं. ....  समाचार पढ़ें
नित्य मानस चर्चा, उत्तर कांड: पर त्रिय लंपट कपट सयाने, मोह द्रोह ममता लपटाने रामवीर सिंह ,  Aug 17, 2017
तर्क के बल पर ईजाद किया हुआ कोई भी पथ समता नहीं ला सकता। इसलिए कहा है कि अंत में कल्पित मार्ग पर चलने से "पावहिं दुख भय रुज सोक वियोग"। शंकराचार्य जी ने तो वैदिक मार्ग से हट कर अन्य कुछ स्वीकार ही नहीं किया। सांख्य मत को भी निरीश्वरवादी होने के कारण त्याज्य माना है। बौद्ध धर्म भी सांख्य मत का समर्थक है। ....  समाचार पढ़ें
यही कारण है कि आपको बादाम रोजाना खाना चाहिए जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 15, 2017
पेनसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में बादाम के विरोधी कोलेस्ट्रॉल के लाभ की पुष्टि की है। बादाम की एक मुट्ठी भर का नियमित सेवन परिपक्व एचडीएल या "अच्छा कोलेस्ट्रॉल” कणों के स्तर में वृद्धि, जो हृदय रोग से जुड़े हैं, 19% तक। ....  समाचार पढ़ें
अंटार्कटिक में पृथ्वी के सबसे बड़े ज्वालामुखीय क्षेत्र की खोज जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 15, 2017
वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक में बर्फ की चादर की सतह से दो किलोमीटर नीचे करीब 100 ज्वालामुखियों का पता लगाया है। दावा किया जा रहा है कि यह इलाका पृथ्वी का सबसे बड़ा ज्वालामुखीय क्षेत्र है। ब्रिटेन में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया कि इस क्षेत्र में 91 ज्वालामुखियों का और पता चला है। ....  समाचार पढ़ें
तिरंगे के साथ गूगल भी डूडल बना मना रहा स्वतंत्रता दिवस 2017 जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 15, 2017
गूगल अपने मुख पृष्ठ पर एक सुंदर रंगीन तिरंगा डूडल से भारत का स्वतंत्रता दिवस 2017 मना रहा है। इस डूडल को भारत में गूगल के होमपेज पर देखा जा सकता हैं. ....  समाचार पढ़ें
हर युग के अपने धर्मः तुलसी सठ की को सुनै, कलि कुचालि पर प्रीति दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 19, 2017
द्वापर युग का व्यक्ति किंकर्तव्यविमूढ़ है। वह अनिश्चय की ऐसी स्थिति में पहुँच चुका है कि जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी वह औचित्य का निर्णय नहीं ले पाता। इसका सर्वाधिक दुखद दृष्टांत था -द्रोपदी का चीरहरण, जिस सभा में भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य जैसे महापुरुष विद्यमान हों, वहाँ इतना बड़ा अन्याय हो पाना तो अभूतपूर्व था ही, किन्तु द्रोपदी द्वारा प्रश्न किए जाने पर भी पितामह भीष्म जैसे धर्मज्ञ, जब निर्णय देने में असमर्थता प्रगट करते हैं, तब इस युग की किंकर्तव्यविमूढ़ता का इससे बड़ा दृष्टांत क्या हो सकता है? ....  लेख पढ़ें
विप्र निरच्छर लोलुप कामीः वर्णाश्रम धर्म व्यवस्था का अवमूल्यित स्वरूप, विघटन दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 17, 2017
यदि ब्राह्मण बेदज्ञान के द्वारा भी विषय की उपलब्धि को लक्ष्य बना ले, तब उन्हें उसमें ब्राह्मण में वे ही गुण अपेक्षित है, जिसका उल्लेख गीता में किया गया है। शम, दम, तप आदि से ही ब्यक्ति विषयाभिमुख बृत्ति से मुक्त हो सकता है।इस तरह मनुस्मृति और गीतोक्त दोनों ही लक्षणों को मानस की एक पंक्ति में समेट लिया गया है। ....  लेख पढ़ें
'सर्वज्ञ-शिव' के सिद्धान्त-दर्शन पर मानस-व्याख्या, वरेण्य, प्रतिपाद्य दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 13, 2017
कोई भी ब्यक्ति ज्ञानी अथवा मूर्ख नहीं है।रघुपति जब भी जिसे जैसा बना देते हैं,वह उस समय वैसा ही प्रतीत होने लगता है। बड़ा ही विलक्षण है वह सिद्धांत, जिसमें ज्ञानी और मूर्ख के भेद को ही अस्वीकार कर दिया गया है।यह मान्यता इस संदर्भ में और भी आश्चर्यजनक जान पड़ती है कि-इसका प्रतिपादन,उस भगवान शिव के द्वारा किया जाय, जिन्होंने सर्वप्रथम देवर्षि नारद को सावधान करने की चेष्टा की थी। ....  लेख पढ़ें
ऐतिहासिक दृष्टि बनाम ईश्वर मूलक दृष्टि, संग्रहालय बनाम मंदिर दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 12, 2017
जो मनुष्य भगवान की लीला को छोड़कर अन्य कुछ कहने की इच्छा करता है,वह उस इच्छा से ही निर्मित अनेक नाम और रूपों के चक्कर में पड़ जाता है।उसकी बुद्धि भेदभाव से भर जाती है।जैसे हवा के झकोरों सेडगमगाती हुई नौका को कहीभी ठहरने का ठौर नहीं मिलता, वैसे ही उनकी चंचल बुद्धि कहीं भी स्थिर नहीं हो पाती ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः सृष्टि ब्रह्मा की कृति नहीं माया की रचना, पर माया भी मिथ्या दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 10, 2017
एक अर्थ में सृष्टि का निर्माण, उसके द्वारा हुआ है, जो स्वतः है ही नहीं, माया है ही नहीं, पर वह संसार का निर्माण करती है, बन्धन की सृष्टि करती है। अद्भभुत पहेली है। पर इसका सीधा सा तात्पर्य है कि जिसकी सत्ता है ही नहीं, वह बंधन और सृष्टि का निर्माण कर भी कैसे सकता है। अतः इस माया की सत्ता केवल ब्यक्ति की भ्रांति में है। अनादिकाल से अगणित ब्यक्तियों के हृदय में यह भ्रम बद्धमूल है। ....  लेख पढ़ें
ईश्वर असीम, तो बुद्धि से उसके रूप की व्याख्या सहज कहां दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 09, 2017
क्या कोई ब्यक्ति यह दावा कर सकता है कि कि ईश्वर के विषय में मैंने पूरी तरह से जान लिया है, ठीक-ठीक जान लिया है? क्योंकि जिसके विषय में पूरी तरह से जान लिया गया, जो बुद्धि की सीमा में आ गया, वह असीम नहीं रह गया, ससीम हो गया। वह तो कोई बुद्धिजन्य पदार्थ ही होगा, ईश्वर तो नहीं होगा। और जब वह जाना नहीं जा सकता, तब तो फिर उसके विषय में केवल संकेत ही करना है, और तब यह संकेत करने वाले पर निर्भर करता है कि किस रूप में संकेत करे, तथा सामने वाला उसका क्या अर्थ ले। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसा, सुंदर कांडः सिन्धु तीर एक भूधर सुन्दर, कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 07, 2017
पर्वत काअभिप्राय है, नीचे से ऊपर की ओर जाना। जब तक हम लोग नीचे से ऊपर की ओर उठने की चेष्टा नहीं करेंगे,तब तक जीवन मे भक्ति देवी का साक्षात्कार नहीं कर पायेंगे। वैसे प्रत्येक ब्यक्ति जीवन में ऊपर उठने की चेष्टा ही तो कर रहा है।पर क्या उसे अपने कार्य में सफलता मिल रही है?। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसा, सुंदर कांडः देहाभिमान चिंतन दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 06, 2017
लंका यात्रा के समय सबने अपनी अपनी असमर्थता ब्यक्त की। अंत में अंगद एक सीमा तक समुद्र लाँघने का बचन देते हुए भी लौट कर आने में कुछ संदेह ब्यक्त करते हैं, और इस संदेह के कारण वे बन्दरों को निराश कर देते हैं। इसके पीछे एक अत्यंत गहरा संकेत सूत्र छिपा हुआ है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसा, सुंदर कांडः सोइ पावन सोइ सुभग सरीरा, जो तनु पाइ भजिअ रघुबीरा दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 05, 2017
वही शरीर पवित्र तथा सुन्दर है, जिसके द्वारा हम भगवान का भजन कर सकें । सुन्दर कांड के मूल केन्द्र में उन सीताजी का पता लगाना है, जो भक्ति रूपा हैं, जिनमें सौन्दर्य की समग्रता है, जो प्रकाश मयी हैं, तथा जो लंका में बन्दिनी के रूप में दिखाई दे रही हैं। पहुँचना किसको है, बन्दर को। यह बिचित्र ब्यंग्य है। बन्दर संसार में कुरूपता का प्रतीक है।लेकिन हनुमान जी ने सीताजी को पा लिया, जबकि न तो उनका जन्म उत्कृष्ट कुल में हुआ है और न आकृति सुन्दर है, वह पशु शरीरधारी हैं। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसा, सुंदर कांडः सावधान मन करि पुनि संकर, लागे कहन कथा अति सुंदर दिनेश्वर मिश्र ,  Aug 04, 2017
इस प्रसंग में आध्यात्मिक साधना का एक बड़ा अद्भुत क्रम है। इसलिये पूरी रामायण में यही एक ऐसा प्रसंग है, जहाँ पर कथा कहते कहते, भगवान शंकर कुछ देर के लिए कथा-रस में डूब जाते हैं। श्रोता का कथा रस में डूब जाना तो गुण है, पर वक्ता अगर कथा के मध्य डूब गया, तो ठीक नहीं है, क्योंकि वह बोलेगा कैसे? बिना बहिर्मुखी हुए, तो बोला नहीं जा सकता। ....  लेख पढ़ें
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