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67वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारः छिछोरे, कंगना और तेरी मिट्टी सहित किसे क्या मिला, जानें यहां जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 23, 2021
सोमवार को 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। इसमें साल 2019 में बनी फिल्मों के लिए पुरस्कारों का ऐलान हुआ. पहले यह आयोजन बीते साल मई के महीने में होना था लेकिन कोरोना की वजह से इसे करीब 10 महीने आगे खिसका दिया गया. ....  समाचार पढ़ें
जॉन अब्राहम और इमरान हाशमी के फैन्स के लिए है फिल्म Mumbai Saga जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 22, 2021
एक लिहाज से कहानी में नयापन नहीं है. तमाम बातें बॉलीवुड और संजय गुप्ता की फिल्मों में पहले देखी गई हैं. फिल्म का पीला-हरा कलर टोन भी यहां उनकी पुरानी ऐक्शन-अपराध कथाओं जैसा है. अपराधी-नायकों का अंदाज हमेशा की तरह स्टाइलिश है. उनके डायलॉग और ऐक्शन ध्यान खींचते हैं. ऐसे में अगर आप बगैर दिमाग खर्च किए देखें तो मुंबई सागा पसंद आएगी. संजय गुप्ता ....  समाचार पढ़ें
Bombay Begums Review: कॉरपोरेट में मी-टू की कहानी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 11, 2021
यहां पांच नायिकाएं हैं. एक लिली (अमृता सुभाष) को छोड़ें तो बाकी चार कॉरपोरेट जगत, अमीर और उच्च मध्यमवर्गीय जीवन जीती हैं. लिली जिस्मफरोशी के पेशे में है मगर अपने लिए इज्जत और बेटे को जीवन में आगे बढ़ते देखना चाहती है. कॉरपोरेट की महिलाएं महत्वाकांक्षी हैं. वे सफलता के शिखर पर आसीन हैं या वहां पहुंचना चाहती हैं ....  समाचार पढ़ें
शौर्य गाथाओं पर हावी प्रेम-परिवार के ड्रामे, 1962: द वार इन द हिल्स Film Review जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 06, 2021
ऐसा लगता है कि वे वेब सीरीज नहीं बल्कि टीवी सीरियल बना रहे हैं, जिसमें मुख्य कथा के साथ भर्ती के ट्रेक इसलिए चलाए जाते हैं कि कहानी का च्यूइंगम बना रहे. दर्शक जुगाली करते रहें. जबकि वेब सीरीज का गणित ठीक उल्टा है. यहां रफ्तार चाहिए. जिसकी 1962 के इस घटनाक्रम में जबर्दस्त गुंजाइश थी. लेकिन मांजरेकर-आचार्य की जुगलबंदी से नतीजा यह निकला कि किरदारों की गृहस्थी, रोमांस, लव लैटरबाजी, प्रेम त्रिकोण, सगाई और शादी जैसी घटनाओं के बीच यह महत्वपूर्ण युद्ध सैंडविच बन गया है. ....  समाचार पढ़ें
The Girl on the Train Review: बॉलीवुड फॉर्मूले बाजी ने कम किया थ्रिल जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 05, 2021
बतौर लेखक-निर्देशक रिभु दासगुप्ता ने दस साल पहले नसीरूद्दीन शाह के साथ माइकल नाम से पहली फिल्म बनाई थी. अमिताभ बच्चन को लेकर सुपरफ्लॉप सीरियल युद्ध के कुछ एपिसोड के वह डायरेक्टर थे. फिर उन्होंने अमिताभ के ही साथ एक कोरियाई फिल्म का रीमेक तीन (2016) के रूप में किया. 2019 में नेटफ्लिक्स पर आई शाहरुख खान की कंपनी रेडचिलीज की फ्लॉप सीरीज बार्ड ऑफ ब्लड का निर्देशन भी रिभु ने किया था. द गर्ल ऑन द ट्रेन में भी वह कुछ बेहतर नहीं कर सके. ....  समाचार पढ़ें
2020 में OTT प्लेटफॉर्म बने सहारा, 78% ने बतायी अलग कानून की जरूरत जनता जनार्दन संवाददाता ,  Feb 15, 2021
इस सवाल के जवाब में 55% लोगों ने हां कहा, उनका मनना है कि कलाकारों, प्रोडसर्स और डायरेक्टर्स को धमकिंयां मिलना चिंता की बात है. वहीं 15 प्रतिशत ने कहा कि यह किसी हद तक उन्हें प्रभावित करता है. 12 प्रतिशत ने कहा कि इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता. तीन प्रतिशत ने इस पर जवाब देने से इनकार कर दिया. ....  समाचार पढ़ें
Madam Chief Minister Review: माया मिली न राम... जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 31, 2021
बैठकों में चाय बांटती तारा पार्टी में सबसे काबिल साबित होने लगती है और राज्य की राजनीति में पार्टी के वरिष्ठजनों और विरोधियों को चित करती हुई मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच जाती है. राजनीति में उससे हाथ मिला कर चुनाव जीतने वाले जल्द ही उसके खिलाफ हो जाते हैं और गोलियां-बंदूकें चल जाती है. यहां फिर तारा की जिंदगी मोड़ लेती है और ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) दानिश रहमान खान (मानव कौल) से वह विवाह कर लेती है. लेकिन राजनीति धोखे और षड्यंत्रों का दूसरा नाम है. तारा के आस-पास चीजें तेजी के बदलती हैं. उसकी कुर्सी और जिंदगी दोनों खतरे में हैं. मगर वह अपनी चतुराई से चुनौतियों से निपटती है. ....  समाचार पढ़ें
Tandav Review: सत्ता के इस खेल में मजा आता है मगर धीरे-धीरे? जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 20, 2021
तांडव का ताना-बाना इसी घटनाक्रम के चारों ओर बुना गया है. साथ ही देश की तस्वीर दिखाने की कोशिश भी है. एक तरफ शाइनिंग इंडिया है, जो नेता और उद्योगपति साठ-गांठ से बना रहे हैं. दूसरी तरफ है भारत. जिसमें किसान-मजदूर और आम आदमी हैं. ये लगातार कसते इंडिया के शिकंजे से भारत की आजादी चाहते हैं. छात्र राजनीति की गलियों में इस आजादी की आवाज मुखर है और इसलिए सत्ता के हाथों में खेलता एक पुलिस अधिकारी कहता हैः अब टेररिस्ट बॉर्डर पार से न आ रहे. ये इन युनिवर्सिटियों में तैयार हो रहे हैं. यहां रातों-रात छात्र राजनीति में चमका सितारा शिव शेखर (मोहम्मद जीशान अयूब) लोगों की उम्मीद बन जाता है. कहानी शुरू से अंत तक राजनीति के दो ध्रुवों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में रहती है. ....  समाचार पढ़ें
Tribhanga Review: टेढ़ी-मेढ़ी मगर खूबसूरत है यह फिल्म जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 20, 2021
हिंदी सिनेमा के सौ साल से अधिक के इतिहास में गिनती की फिल्में बनी हैं जिनमें मां-बेटी के रिश्तें केंद्र में रहे हों. त्रिभंगः टेढ़ी मेढ़ी क्रेजी तीन पीढ़ियों की मां-बेटी की कहानी है. इस लिहाज से यह खास है. अक्सर जिंदगी परिवारों में अपने आप को दोहराती है. वह गुजरती नहीं है. डीएनए की तरह सुख-दुख भी मां से बेटी को मिलते हैं. मां ने जो जिंदगी गुजारी, आंसू और मुस्कान के अलग रंग-रोगन के साथ वही बेटी के जीवन के कैनवास पर उभरने लगती हैं. निदा फाजली का शेर हैः बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता/जो बीत गया है वो गुजर क्यों नहीं जाता. ....  समाचार पढ़ें
इंदू की जवानी Film REVIEW जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 17, 2020
जवानी जिंदगी का प्राइम टाइम है. यह सही ढंग से काम आ जाए, इसी में इसकी सार्थकता है. कोई जवानी देश के काम आती है, कोई समाज के. कोई घर-परिवार की जिम्मेदारियां उठाते-उठाते चुक जाती है. कुछ प्रेम की बलि चढ़ जाती हैं तो कुछ रास्तों से भटक जाती हैं. लेकिन इंदू की जवानी किसी काम की नहीं है. थियेटरों में आई यह फिल्म 2020 की सबसे खराब फिल्मों में है. धनपति निर्माता बंद कमरों की चुटकुलेबाजी, फूहड़ बातों और कुंठित चर्चाओं को कॉमेडी मान लेते हैं. वे इंदू को इंडिया नाम देते हैं और टिंडर जैसे डेटिंग ऐप पर किसी पाकिस्तानी को ढूंढ कर सूने घर में अकेली लड़की की जिंदगी में झंडा गाड़ने के लिए बुला लेते हैं. एक लाइन में यही इंदू की जवानी की कहानी है. ....  समाचार पढ़ें
कहीं भूखमरी की काल कोठरी में ही न समा जाएं ग्लैमर की दुनिया का यह अनदेखा तबका आशीष कौल ,  May 03, 2020
यह कहते हुए दुःख हो रहा लेकिन ऐसा समझाया और दिखाया जाता है कि सब कुछ ठीक है और फिल्म कामगार पैसे और सम्पन्नता के तालाब में गोते लगा रहे हैं | सच्चाई ये है कि इनकी हालत अच्छी नहीं है और बहुत कम लोग सामने आकर इन लोगों की मदद करते हैं | इस वक़्त जब देश रुक गया है तब मोटे ....  लेख पढ़ें
शाहिद कपूर की फ़िल्म कबीर सिंह और प्रेम के नाम पर घृणा और औद्धत्य का महिमामण्डन त्रिभुवन ,  Jul 06, 2019
प्रेमहीन सेक्स कोरी धूप है तो प्रेम से लबरेज जीवन में संसर्ग वैसा ही है, जैसे बादलों की फुहार के बीच की वह हल्की सी धूप जिसमें इंद्रधनुष सात रंग लेकर आपकी पलकों पर फैला देता है और जिसमें सूखती शाखाएं सब्ज़ हो जाती हैं और सब्ज़ शाखाओं में फूल खिल उठते हैं। होंटों पर सपने लरजने लगते हैं और सोच में तितलियां उड़ने लगती हैं। लेकिन ऐसा कोई नायक नहीं होता, जो ड्रग्स ले, घिनौने ढंग से जींस में बर्फ भरे औ ....  लेख पढ़ें
परमाणु परीक्षण भारत का सर्वाधिक निर्णायक क्षण था: जॉन अब्राहम राधिका भिरानी ,  May 28, 2018
परमाणु शुक्रवार को रिलीज हुई। यह राजस्थान के पोखरण में 1998 में किए गए परमाणु परीक्षण की कहानी है। यह दुनिया में परमाणु जासूसी का सबसे बड़ा मामला है, और यह भारत की माटी पर हुआ। मैंने सोचा कि इस कहानी को कहा जाना चाहिए। मैंने खुद से पूछा, 'क्या इस फिल्म को पर्दे पर उतारना बहुत मुश्किल है?' और फिर मैं मुस्कुराया क्योंकि मैं इसे करने जा रहा था। क्योंकि इसे पर्दे पर उतारना मुश्किल है और यह एक फॉर्मूला फिल्म नहीं थी।" ....  लेख पढ़ें
ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़: कलाकारों के लिए चुनौती भरा समय अमूल्य गांगुली ,  Nov 20, 2017
हिन्दी सिनेमा 'पद्मावती' की रिलीज पर विवाद की जड़ में सबसे पहले तो भगवा ध्वजवाहक हैं जो मुस्लिम विरोधी पूर्वाग्रह के साथ इतिहास की विवेचना करते हैं। दूसरा भारतीय जनता पार्टी है जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से संस्थागत स्वायत्तता को धीरे-धीरे कम करती जा रही है। ....  लेख पढ़ें
मैं 'इंदु सरकार' किसी को नहीं दिखाऊंगा: मधुर भंडारकर जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 16, 2017
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मधुर भंडारकर अपनी आगामी फिल्म 'इंदु सरकार' को लेकर हर तरह के स्पष्टीकरण देकर थक गए हैं. यह फिल्म 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल पर आधारित है. गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड ने 'इंदु सरकार' में कई कट लगाने के सुझाव दिए हैं, वहीं मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने फिल्म को रिलीज करने से पहले इसे उनकी पार्टी को दिखाए जाने की मांग की है. ....  लेख पढ़ें
वर्चुअल रियलिटी फिल्म 'ल मस्क' से निर्देशन में आए एआर रहमान ने माना, यही सही मौका जनता जनार्दन डेस्क ,  May 11, 2017
ऑस्कर पुरस्कार विजेता दिग्गज संगीतकार ए.आर. रहमान जो बतौर संगीतकार, संगीत के क्षेत्र में अपनी महारत सिद्ध कर चुके हैं, वह अब दुनिया की पहली वर्चुअल रियलिटी फिल्म 'ल मस्क' के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में भी अपना हुनर साबित करने जा रहे हैं। ....  लेख पढ़ें
कोस्टारिका में छाए भारतीय अभिनेता प्रभाकर शरण आर. विश्वनाथन ,  Dec 26, 2016
बिहार के एक छोटे से शहर मोतिहारी के प्रभाकर शरण एक तरह से बॉलीवुड के पश्चिम की तरफ मार्च के प्रतीक बन गए हैं। 50 लाख से भी कम आबादी वाले मध्य अमेरिका के एक छोटे से देश कोस्टारिका में 1997 से बसे प्रभाकर ने लैटिन अमेरिकी फिल्म 'एनरेडाडोस : ला कंफ्यूजन' (एंटैंगल्ड : द कंफ्यूजन) में बतौर हीरो काम किया है। ....  लेख पढ़ें
नंदिता से बन गईं नगमा शिखा त्रिपाठी ,  Dec 25, 2016
अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री नगमा हिंदी समेत कई भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुकी हैं। वह भोजपुरी फिल्मों की भी जानी-मानी अभिनेत्री हैं। इन दिनों वह राजनीति में सक्रिय हैं। नगमा का जन्म एक मुसलमान मां और हिंदू पिता के घर क्रिसमस के दिन 25 दिसंबर, 1974 को हुआ था। उनका असली नाम नंदिता अरविंद मोरारजी है। ....  लेख पढ़ें
बॉलीवुड-हॉलीवुड जोड़ियों में लगी अलगाव की होड़ दुर्गा चक्रवर्ती ,  Dec 17, 2016
वर्षो मनोरंजन की दुनिया प्यार और रोमांस के लोकप्रिय मानदंड स्थापित करती आई है, लेकिन फिल्मी दुनिया की काल्पना से परे वास्तविक दुनिवाय में प्यार की कहानियां बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों में अलगाव के मोड़ पर पहुंचकर खत्म हो जाती है. ....  लेख पढ़ें
रजनीकांत: कुली से बन गए सुपरस्टार जनता जनार्दन डेस्क ,  Dec 16, 2016
अपने अनोखे अंदाज और बेहतरीन अभिनय से फिल्म जगत में अलग मुकाम हासिल कर चुके सुपरस्टार रजनीकांत एक ऐसा नाम है, जो सभी की जुबां पर चढ़कर बोलता है। उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष किया है। रजनीकांत आज इतने बड़े सुपरस्टार होने के बावजूद जमीन से जुड़े हुए हैं। वह फिल्मों के बाहर असल जिंदगी में एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही दिखते हैं और उनके प्रशंसक उन्हें प्यार ही नहीं करते बल्कि उन्हें पूजते हैं। ....  लेख पढ़ें
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