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अवमानना के लिए एक को कैद

जनता जनार्दन संवाददाता , Mar 27, 2011, 14:30 pm IST
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मुंबई: उच्च न्यायालय ने एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ ‘द्वेषपूर्ण’ और ‘अपमानित करने वाली’ टिप्पणियों पर नासिक के एक नागरिक को एक महीने कैद की सजा सुनाई है। उसे अपने से अलग रह रही पत्नी को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

अवमानना कार्यवाही का सामना करने वाले ज्ञानदेव जाधव ने अगस्त 2009 में बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और भारत की राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट यूटी पोल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।

पत्र में आरोप लगाया गया कि पोल अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं और उन्होंने पक्षपात किया।

उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार ने जांच करने के बाद जाधव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की।
मजिस्ट्रेट पोल ने अप्रैल 2007 में जाधव को निर्देश दिया था कि वह अपने से अलग रह रही पत्नी को हर महीने 1200 रुपये और अपने दो साल के बेटे के लिए 600 रुपये प्रतिमाह खर्च के लिए देगा।

जाधव ने 2009 में लिखे पत्र में मजिस्ट्रेट के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाये थे।

अवमानन प्रक्रिया शुरू होने के बाद जाधव उच्च न्यायालय के समक्ष हाजिर हुआ और उसने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसने अवसाद और रोष में पत्र लिखा था।

लेकिन न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति ए.आर. जोशी की खंडपीठ ने पिछले हफ्ते अपने आदेश में जाधव की माफी को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जाधव ने जीविका खर्च देने के आदेश के दो साल बाद पत्र लिखा।

अदालत ने उसे एक माह कैद की सजा के अलावा उस पर 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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