रॉक स्टार क्या दिखाएगी अपना रॉक कमाल!

रॉक स्टार क्या दिखाएगी अपना रॉक कमाल!

नई दिल्ली: निर्देशक इम्तियाज अली ने "रॉक स्टार" से पहले तीन फिल्में बनाई हैं जिनका कथानक प्रेम पर आधारित रहा है। इम्तियाज ने "रॉकस्टार" में भी अपना यही दृष्टिकोण रखा है। लेकिन कथानक में नयापन न होने के कारण लगता है कि इम्तियाज अपने को दोहरा रहे हैं।

अपनी वह ताजगी खो रहे हैं, जिसके लिए वह जाने जाते रहे हैं।हालांकि जिस शिद्दत के साथ कथानक में समानता होने के बावजूद उन्होंने प्रेम को नए कोण से देखने की कोशिश की है, उसकी जितनी तारीफ की जाए वह कम है।

प्यार के बारे में इम्तियाज का नजरिया बहुत स्वाभाविक है। वह उसके होने और टूटने को प्रकृति की सबसे बडी घटना के रूप में न देख कर जीवन में घटने वाली अन्य सामान्य घटनाओं के रूप में देखते हैं।

यही कारण है कि उनकी फिल्म से उभरने वाला प्यार का यह दर्शन युवा पीढी को पसंद आता है और उनकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए आयाम रचने में कामयाब होती है। इम्तियाज ने अपनी अब तक निर्देशित फिल्मों से यह साबित किया है कि वे पटकथा पर पकड रखने वाले निर्देशक हैं।

रॉक स्टार की कहानी दिल्ली के कॉलेज कैम्पस में पनपती एक कमसिन प्रेम कहानी की तरह शुरू होती है, परन्तु अपने सपनों को सच करने वाले युवा को घर छोडना पडता है।

दरअसल यह एक प्रेम कहानी है और प्रेम की प्रक्रिया से गुजरकर स्वयं को खोज पाने की कहानी है। प्रेम को व्यवस्था का विरोध समझा जाता है और खुद की तलाश को गुनाह माना जाता है।

"रॉक स्टार" एक ऎसे युवा की कहानी है जिसका सपना है वह संगीत के क्षेत्र में ऊंचाईयों को छुए। उनकी जिंदगी का सबसे बडा सपना यह है कि वह "जिम मॉरिसन" जैसा रॉक स्टार बने।

लेकिन उसे अपने समाज और श्रोताओं से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता। उसके संगीत के प्रति जुनून को देखकर कैम्पस कैंटीन इंचार्ज खटाना (कुमुद मिश्रा) उसे किसी लडकी से सच्चा प्यार करने और प्यार में दिल टूटने के बाद सिंगर बनने की सलाह देता है। कलाकार को सफलता हासिल करने के लिए ट्रेजडी से गुजरना जरूरी है।

अपनी जिंदगी में ट्रेजडी घटित करने के लिए वह कॉलेज की सबसे खूबसूरत लडकी हीर कौल (नरगिस फाकरी) से प्रेम कर बैठते हैं, जो सुंदर तो है, लेकिन लडकों का दिल तोडने में माहिर है।

उन्हें लगता है कि नरगिस उनका दिल तोड देगी, जिससे उनकी जिंदगी में ट्रेजडी घटित होगी और वह दुनिया के नामी सिंगर बन जाएंगे यही सोच जर्नादन (रणबीर कपूर) को अपने मुकाम पर पहुंचाती है। प्यार के बारे में जैसा वह सोच कर चला था, वैसा नहीं होता, वह हर प्यार करने वाले के साथ बदलता है।

निर्देशक इम्तियाज अली ने रणबीर कपूर की अभिनय क्षमता का भरपूर इस्तेमाल अपनी इस फिल्म में किया है। चार साल के अभिनय करियर में पहली बार रणबीर कपूर ने "रॉक स्टार" के जरिए स्वयं को बॉक्स ऑफिस का सुपर सितारा साबित किया है।

निश्चित रूप से "रॉक स्टार" से बॉलीवुड को एक नया शहंशाह, नया बादशाह मिल गया है, जो अकेले अपने दम पर फिल्म देखने के लिए दर्शकों को प्रेरित कर सकता है। रणबीर कपूर ने "रॉकस्टार" में जनार्दन के रूप में बेहद सहज अभिनय किया है।

उनकी संवाद अदायगी और बॉडी लैंग्वेज में गहरी रचनात्मकता है। हीर कौल के रूप में नरगिस फाखरी बेहद सुन्दर लगी हैं लेकिन मध्यान्तर बाद वे ओवर एक्टिंग का शिकार हो गई हैं। उन्हें अभी काफी मेहनत करनी पडेगी।

कैंटीन इंचार्ज के रूप में कुमुद मिश्रा और संगीत कम्पनी के मालिक के रूप में पीयूष मिश्रा ने बेहतरीन अभिनय किया है। फिल्म का एक बडा आकर्षण शम्मी कपूर भी हैं। शम्मीजी ने संगीत उस्ताद का बेहद प्रभावी रोल किया है।

वह लीक से हट कर और अलग अंदाज में हैं। फिल्म में संगीत के आचार्य उस्ताद जमील खान के रूप में उन्होंने अपने चेहरे के भावों को बेहद खूबसूरती के साथ बयां किया है। फिल्म में वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने जनार्दन की संगीत क्षमता को पहचाना था।

शम्मी कपूर जिन दिनों अपने जीवन पर बन रही डॉक्यूमेंट्री "द किंग ऑफ रोमांस" में काम कर रहे थे, उन्हीं दिनों दिल्ली आकर उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग की थी।
"द किंग ऑफ रोमांस" उनकी अंतिम फिल्म साबित हुई और "रॉक स्टार" के केमियो रोल का शॉट अंतिम शॉट।

फिल्म के दो पहलू ऎसे हैं जिन पर टिप्पणी किए बिना "रॉक स्टार" के बारे कुछ भी कहना अधूरापन लगेगा। एक अरसे बाद छायाकार अनिल मेहता ने बेहद खूबसूरत लोकेशन्स को अपने कैमरे में इतनी सुन्दरता के साथ उतारा जिसे परदे पर देखते वक्त आँखों में ठंडक का अहसास होता है, साथ ही मन इन स्थानों पर जाने की इच्छा व्यक्त करने लगता है।

दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और चैकोस्लोवाकिया की खूबसूरती देखते ही बनती है। फिल्म का दूसरा सबसे बडा आकर्षक पहलू इसका संगीत है। गीतकार इरशाद कामिल और संगीतकार ए.आर. रहमान ने अरसे बाद हिन्दी फिल्मों में वापसी करते हुए बेहद कर्णप्रिय धुनें दी हैं।

"रॉक स्टार" का गीत संगीत युवा सपनों और डर के साथ उनकी बेकरारी व बेबसी को बयां करता है। इसका समग्र प्रभाव बहुत गहरा है। "रॉक स्टार" की ध्वनियों की गहराई को समझने के लिए इसे सुनने के बाद कुछ देर के लिए तन्हाई में बैठे, फिर उनकी गूंज को महसूस करें।

गीतकार इरशाद कामिल ने सामान्य शब्दों के अन्दर जो गहराई परोसी है वह तारीफे काबिल है। इस फिल्म का एक गीत है जिसे निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर फिल्माया गया है। इस गीत का फिल्मांकन और इसका समग्र प्रभाव असरकारक है।

गीत के बोल हैं, "कदम बढा ले, हदों को मिटा दे, आजा खालीपन में, पी का घर तेरा, तेरे बिन खाली। कुन फाया कुन।" "कुन फाया कुन" को बार-बार दोहराया गया है। ऎसे ही एक गीत है "साड्डा हक, एत्थे रख" जिसमें युवाओं की मजबूरी को खूबी के साथ दर्शाया है।

आगे के बोल हैं, "मर्जी से जीने की भी मैं, क्या तुम सबको अर्जी दू। क्यों तू काटे मुझे, क्यों बांटे मुझे इस तरह। क्यों सच का सबक सिखाए, जब सच सुन भी न पाए।" जितने उम्दा गीतों के बोल हैं संगीत है उतनी ही उम्दा आवाज में मोहित चौहान ने गीतों को अपना स्वर दिया है।

गीतकार व संगीतकार की आवश्यकता के अनुसार उन्होंने अपनी आवाज के उतार चढाव को पेश किया है। "रॉक स्टार" के बाद मोहित चौहान की गिनती काबिल गायकों में होगी इसमें कोई शक नहीं है।

फिल्म में इम्तियाज अली ने खूबियों के साथ-साथ कुछ ऎसी कमियां भी दर्शायी हैं जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं। फिल्म का पहला दृश्य जहां "रॉक स्टार" को कुछ लोगों से लडते झगडते हुए दिखाया जाता है और उसके बाद अपने कार्यक्रम स्थल पर आकर गीत गाना।

इस दृश्य में यह समझ से परे रहा है कि आखिर ऎसा क्या कारण था जिसकी वजह से रॉक स्टार उन लोगों से लड रहा था। इस दृश्य को फिल्म में दो-चार बार दोहराया गया है। इसके अतिरिक्त जब रणबीर कपूर मशहूर रॉक स्टार बन जाते हैं तब वे या उनके परिजन उनसे सम्पर्क क्यों नहीं करते हैं।

एक सबसे बडा प्रश्न जो इम्तियाज अली की सोच पर प्रश्न चिह्न लगाता है "क्या भारतीय समाज इतना परिपक्व हो गया है कि वह अपने घर की बहू बेटियों के शादी के बाद पर-पुरूष से शारीरिक सम्बन्धों को बर्दाश्त कर सके।" यह एक ऎसा ज्वलंत प्रश्न है जिस पर इम्तियाज को एक बार फिर से सोचना चाहिए।

हमारी सोच के मुताबिक कोई भी परिवार इस प्रकार के घटनाक्रम को किसी भी सूरत में स्वीकृत नहीं देगा। हालांकि उन्होंने इस तरह के रिश्ते को नायिका द्वारा स्वीकार न करने की बात को भी दिखाया है लेकिन तब जब सब कुछ बीत चुका होता है।

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