अब अफ्रीकी देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा चीन

अब अफ्रीकी देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा चीन एशिया के कई देशों को कर्ज के जाल में फंसाने के बाद चीन अब अफ्रीकी देशों को व्यापक रूप से कर्ज देकर अपनी गिरफ्त में ले रहा है. चीन की इस चाल को कूटनीति के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है. चीन अफ्रीका में जिन देशों को कर्ज दे रहा है, वो इन पैसों को बुनियादी ढांचों के साथ ही सैन्य उपकरण खरीदने पर भी खर्च कर रहे हैं. खास बात यह कि इन सैन्य उपकरणों की आपूर्ति अधिकतर चीनी कंपनियां ही कर रही हैं.

बोस्टन विश्वविद्यालय के वैश्विक विकास नीति केंद्र द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चीन ने विभिन्न अफ्रीकी देशों को कुल 1,188 ऋण दिए हैं, जो कुल ऋण राशि में 159.9 बिलियन डॉलर है. इनमें से अधिकांश लोन परिवहन और बिजली उत्पादन परियोजनाओं के लिए दिए गए हैं. चीन इस पैटर्न पर सबसे ज्यादा लोन बांटता है.

हालांकि, 1188 लोन में से 27 में से 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि रक्षा संबंधी परियोजनाओं के लिए दी गई है. इनमें से 13 लोन तो अकेले जाम्बिया देश को चीन ने दिया है. जाम्बिया ने कुल 2.1 बिलियन अमरीकी डॉलर का ऋण विशेष रूप से रक्षा संबंधी उपकरणों की खरीद के लिए लिया है. जाम्बिया के अलावा घाना, कैमरून, तंजानिया, जिम्बाब्वे, सूडान, सिएरा लियोन और नामीबिया जैसे देशों ने भी रक्षा के लिए चीन से लोन लिया है.

2006 से 2019 तक लिए लोन का उपयोग जाम्बिया ने मुख्य रूप से चीनी विमानों की खरीद के लिए किया है. इन विमानों को उसने अपनी वायु सेना में शामिल किया है. आंकड़ों के अनुसार, जाम्बिया ने अलग-अलग कैटेगरी के कुल 28 सैन्य विमानों का ऑर्डर चीन को दिया. वहीं, जिम्बाब्वे ने चीनी K-8 जेट ट्रेनर विमान की 12 यूनिट का ऑर्डर दिया. अब अगर इस ट्रैप को समझें तो पहले चीन लोन देकर कर्ज का बोझ डालता है. इसके बाद सैन्य उपकरण या अन्य सामान की खरीद के लिए चीनी कंपनियों को ही आगे करता है. इससे उस सामान की मेंटिनेंस के लिए भी ये देश चीन पर ही निर्भर रहते हैं. इस तरह एक चक्र बनाकर चीन इन देशों को फंसा रहा है.  

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) लगातार अफ्रीकी और अन्य देशों को लगातार ये चेतावनी दे रहा है कि उन पर चीन का बढ़ता कर्ज खतरनाक हो सकता है. आईएमएफ ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि चीन का कर्ज कुछ अस्थिरता या कमजोरियां पैदा करता है. हाल ही में विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने कहा कि चीन को विकासशील देशों में उधार देने के सिस्टम में सुधार करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले ऋणों में पारदर्शिता के संदर्भ में. आंकड़ों के अनुसार, चीन की गिनती दुनिया में कर्ज देने वाले प्रमुख देशों में होती है. विकासशील कम आय वाले 75 देशों को जो लोन दिया गया है, उसमें से चीन का हिस्सा करीब 60 प्रतिशत है.
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