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आशा के ध्वजवाहक! नवोदय कोरोना योद्धाओं ने 'जेएनवी कोविड हेल्पलाइन' से महामारी में बचाई हजारों की जान

जनता जनार्दन संवाददाता , Jun 09, 2021, 21:16 pm IST
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आशा के ध्वजवाहक! नवोदय कोरोना योद्धाओं ने 'जेएनवी कोविड हेल्पलाइन' से महामारी में बचाई हजारों की जान नई दिल्ली: जवाहर नवोदय विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं के एक समूह ने कोविड महामारी के दौरान सेवा की एक अलग मिसाल कायम की. इस समूह के छात्रों ने बिना किसी भेदभाव के सेवा की भावना को ऊपर रखा और व्हाट्सएप पर 'कोविड हेल्प ग्रुप' बनाकर लोगों की मदद की.

कोरोना के दूसरे चरण में मची अफरातफरी के बीच इस समूह ने देश भर में 5000 से अधिक कोविड मरीजों को मदद पहुंचाई. इनके समूह के 80 से अधिक सदस्यों, जिनमें डॉक्टर्स, ब्यूरोक्रेटस, पत्रकार, प्रोफेसर के अलावा अन्य क्षेत्रों में कार्यरत लोग भी शामिल हैं, ने लोगों की मदद के लिए दिन रात एक कर दिया.

इस समूह में लगभग 40 डॉक्टर भी शामिल थे, जो मूलतः बिहार के रहने वाले थे, पर इस राज्य के साथ-साथ अन्य जगहों पर भी कार्यरत हैं. ये सभी डॉक्टर प्रतिदिन अपनी ड्यूटी के बाद, मरीजों को टेलिफोनिक काउंसलिंग के जरिए दवाई, आक्सीजन संबंधी परामर्श के साथ-साथ कोविड के मरीजों पर निगरानी बनाए हुए थे.

इन लोगों ने मिलकर जिन 5000 के करीब मरीजों की देखभाल की, उनमें लगभग 2000 गंभीर मरीज होम-आइसोलेशन में ही पूरी तरह स्वस्थ हो गए. लगभग 2500 कम गंभीर मरीज भी उचित चिकित्सकीय परामर्श से स्वस्थ हुए. लगभग 200 लोगों को अस्पताल में ले जाने की जरूरत हुई, उसमें करीब 150 मरीजों को सुरक्षित रूप से यह समूह अपने संपर्कों से उचित इलाज दिलाने में सफल रहा.

समूह के संस्थापक सदस्यों के मुताबिक, मई के पहले सप्ताह तक उन्हें प्रतिदिन लगभग 100-150 फोन कॉल आने लगे. विचार-विमर्श के बाद इन लोगों ने तय किया कि बिना गंभीर स्थिति के अस्पताल में भर्ती को को हतोत्साहित किया जाए और लोगों को घबराने से रोकने हेतु उपाय किया जाए. सबने मिलकर अपने पूर्व छात्रों के समूह में डॉक्टरों से जोड़ा जो टेलीफोन परामर्श के लिए खुशी-खुशी सहमत हो गए.

समूह ने मरीजों और चिकित्सकों के बीच समन्वय स्थापित किया, और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से हल्के और यहां तक कि मध्यम रोगियों को घर पर चिकित्सा देखभाल प्रदान किया. जिला प्रशासन, पत्रकारों और समूह के प्रभावशाली शिक्षाविदों की मदद से मरीजों के लिए दवाओं और ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भी की गई. अस्पताल में प्रवेश केवल उन लोगों के लिए था जो गंभीर थे और जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता थी.

इस समूह ने घर पर इलाज करा रहे मरीजों की सूची तैयार की और कोशिश की कि ऐसे मरीजों को उनके पास मौजूद डॉक्टरों की टीम दिन में दो बार ऑनलाइन संपर्क, सुझाव और इलाज संबंधी निगरानी जरूर करे. समूह ने अपने संचालन के लिए एक वर्चुअल मेडिकल बोर्ड भी बनाया, जहां विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम द्वारा प्रतिदिन स्वास्थ्य और संसाधन से जुड़े मामलों पर चर्चा की जाती थी.

हालांकि 'कोविड हेल्प ग्रुप' का अधिकांश काम ऑनलाइन मोड तक ही सीमित था, फिर भी ऐसे स्वयंसेवक थे जो आवश्यकता पड़ने पर ऑफ़लाइन काम कर रहे थे. इस समूह ने ऐसे सहयोगियों के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाले बिना लोगों की सुरक्षित सेवा सुनिश्चित करने के लिए ई-प्रशिक्षण के कई सत्र आयोजित किए. उन्होंने बार-बार उनसे फोन के माध्यम से सोशल मीडिया और संपर्कों का पूरा उपयोग करने और अत्यधिक आवश्यकता होने पर ही बाहर निकलने का आग्रह किया. मरीजों के परिचारकों को भी चिकित्सा उपकरणों को संभालने के तरीके के बारे में ऑनलाइन प्रशिक्षित किया गया था.

जेएनवी यानी जवाहर नवोदय विद्यालय के पूर्व छात्रों के इस समूह में डॉक्टर्स, पत्रकारों, ब्यूरोक्रेटस, प्रोफेसरों के अलावा हर क्षेत्र के लोग थे. इस समूह के मुख्य रूप से सक्रिय सदस्य रंजन झा, प्रोफेसर अखिलेश कुमार, लखीसराय के ए.एस.पी अमृतेश कुमार, रविन्द्र कुमार (जिलाधिकारी बुलंदशहर), कविता (प्रोग्राम ऑफिसर, बिहार सरकार), पत्रकार श्वेता झा, डॉक्टर हरिमोहन, डॉक्टर सुमित, डॉक्टर पिंटू, डॉक्टर बिपिन, डॉक्टर प्रेरणा, डॉक्टर अनिमेश, अविनिश, डॉक्टर राजीव, डॉक्टर अमित प्रियदर्शी, साकेत दयाल के साथ-साथ कई लोग शामिल थे.

यह समूह अभी भी भंग नहीं हुआ है और इस गंभीर आपदा में सक्रिय है. ऐसे समय में जब बिहार सहित पूरा देश, सरकारी मशीनरी के लगभग पूर्ण पतन के बीच घातक वायरस के सबसे खराब ज्वार के खिलाफ लड़ रहा है, ये गुमनाम नायक जरूरतमंदों के लिए आशा के ध्वजवाहक के रूप में उभरे हैं.
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