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पूरा लाल चांद और चक्रवाती तूफान यास का मेल हो सकता है बेहद खतरनाक, पीएम मोदी ने ली बैठक

जनता जनार्दन संवाददाता , May 23, 2021, 13:59 pm IST
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पूरा लाल चांद और चक्रवाती तूफान यास का मेल हो सकता है बेहद खतरनाक, पीएम मोदी ने ली बैठक नई दिल्लीः चक्रवाती तूफान यास के बढ़ते खतरे के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह समेत कई अन्य मंत्री भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यास के खतरों के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा की गई.

इस बैठक में और इससे पहले कैबिनेट सचिव की बैठक में गृह, विद्युत, शिपिंग, दूरसंचार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन एवं मत्स्य पालन मंत्रालयों के सचिव, भूविज्ञान विभाग के सचिव, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, एनडीएमए के सदस्य सचिव, आईडीएस के प्रमुख और तटरक्षक बल, एनडीआरएफ और आईएमडी के महानिदेशक भी मौजूद थे.

पर इस बीच चक्रवाती तूफान यास की बढ़ती गति के साथ एक नई चिंता वैज्ञानिकों को सता रही है. केवल चक्रवात यास ही विशेषज्ञों और अधिकारियों को चिंतित नहीं कर रहा है, बल्कि हवा के कम दबाव के बीच ज्वार की संभावना के मेल ने भी वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं. पूर्णिमा और चंद्रग्रहण भी 26 मई को है, जबकि इसके चलते समुद्र में ज्वार आता ही आता है.

जादवपुर विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ ओशनोग्राफिक स्टडीज के निदेशक तुहिन घोष के मुताबिक, "वसंत ज्वार के दौरान वैसे भी समुद्र और तटीय इलाकों में जल स्तर सामान्य से अधिक रहता है और ज्वार बहुत अधिक होता है. यदि ऐसे समय में तूफानी चक्रवात यास के साथ इसका मेल होता है, तो तूफान के समुद्री उछाल की कल्पना भी मुश्किल है. ऐसे में यह बहुत अधिक विनाशकारी होगा. सुंदरबन में तटबंध टूट सकते हैं और इससे बड़े इलाके में बाढ़ आ सकती है."  घोष ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में तबाही और अधिक होगी यदि चक्रवात पूर्व से पश्चिम दिशा में हमला करता है, जैसा कि मई 2009 में चक्रवात आइला के दौरान देखा गया था.

बता दें कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान यास के 26 मई की शाम तक पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट से टकराने की संभावना है.  तूफान के खतरे को ध्यान में रखते हुए तैयारियां तेज कर दी गई हैं. पीएम मोदी की बैठक से पहले चक्रवाती तूफान यास से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की भी बैठक हुई.

इस बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने की. मीटिंग के दौरान यास से निपटने के लिए केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों, एजेंसियों की तैयारियों के बारे में जानकारी ली गई थी. भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक ने इस समिति को चक्रवाती तूफान के ताजा हालात के बारे में जानकारी से भी अवगत कराया.

इस बैठक में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार, पुडुचेरी के मुख्य सचिव और अधिकारियों ने भाग लिया. बैठक में गृह, विद्युत, शिपिंग, दूरसंचार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन एवं मत्स्य पालन मंत्रालयों के सचिव, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, एनडीएमए के सदस्य सचिव, आईडीएस के प्रमुख और तटरक्षक बल, एनडीआरएफ और आईएमडी के महानिदेशक शामिल हुए थे.

आईएमडी के मुताबिक इस चक्रवाती तूफान के 26 मई की शाम तक पश्चिम बंगाल और समीपवर्ती उत्तरी ओडिशा के तट तक पहुंचने की संभावना है. इस दौरान 155 से लेकर 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से हवा चलने के साथ ही कई राज्यों के तटीय जिलों में भारी बारिश और तूफानी लहरें की संभावना जताई गई है.ऐसे में तैयारियां तेज कर दी गई हैं.

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान यास के 26 मई की शाम तक पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट से टकराने की संभावना है. इसे देखते हुए तूफान से प्रभावित होने की आशंका वाले इलाकों में नेशनल डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स (एनडीआरएफ) की 65 टीमें तैनात किए जाने की तैयारी है. एनडीआरफ की 20 और टीमें भी तैयार रहेंगी जिन्हें जरूरत पड़ने पर तैनात किया जाएगा.

चक्रवाती तूफान यास से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की बैठक हुई. इस बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने की. बैठक में यास से निपटने के लिए केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों, एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा की गई. भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक ने इस समिति को चक्रवाती तूफान की नवीनतम स्थिति के बारे में जानकारी दी.

आईएमडी के मुताबिक इस चक्रवाती तूफान के 26 मई की शाम तक पश्चिम बंगाल और समीपवर्ती उत्तरी ओडिशा के तट तक पहुंचने की प्रबल संभावना है. इस दौरान 155 से लेकर 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से हवा चलने, इन राज्यों के तटीय जिलों में भारी बारिश और तूफानी लहरें उठने की आशंका है. संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव ने समिति को चक्रवाती तूफान से निपटने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी दी और यह भी बताया कि निचले इलाकों से लोगों को निकालने का कार्य लगातार किया जा रहा है.

राज्यों के मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि खाद्यान्न, पेयजल और अन्य जरूरी वस्‍तुओं की आपूर्ति के लिए इनके पर्याप्त स्टॉक की व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही बिजली और दूरसंचार जैसी आवश्यक सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं. एनडीआरएफ ने 65 टीमें उपलब्ध करा दी हैं और 20 अतिरिक्त टीमों को भी तैयार रखा गया है. जहाज और विमान के साथ थल सेना, नौसेना और तटरक्षक बल के रेस्क्यू दल भी तैनात किए गए हैं.

अस्पतालों और कोविड केयर सेंटर का भी सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं. देशभर के कोविड केयर सेंटर के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन और आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है. तूफान से निपटने की तैयारियों की समीक्षा करते हुए राजीव गाबा ने जोर देकर कहा कि सभी उपाय समयबद्ध तरीके से किए जाने चाहिए ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो. गाबा ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि कोरोना संक्रमितों की हिफाजत सुनिश्चित की जाए और कोविड अस्पताल के कामकाज में कोई भी बाधा आने से हर हालत में बचा जाए.

उन्होंने यह भी सलाह दी कि चक्रवाती तूफान से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन के उत्पादन के साथ-साथ वहां से देश के अन्य हिस्सों में इसकी आवाजाही बनाए रखने के लिए सभी ठोस कदम उठाए जाएं. कैबिनेट सचिव ने यह भी कहा कि बिजली, दूरसंचार और अन्य जरूरी सेवाओं को तेजी से बहाल करने के लिए सभी शुरुआती व्‍यवस्‍था कर ली जाए. उन्होंने संबंधित एजेंसियों को आपस में पूरे तालमेल के साथ काम करने और राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को सभी जरूरी सहायता प्रदान करने के भी निर्देश दिए. उन्होंने उन क्षेत्रों से लोगों को जल्द से जल्द निकालने पर जोर दिया जिनके चक्रवाती तूफान से प्रभावित होने की आशंका है.

कैबिनेट सचिव गाबा ने समुद्र में मौजूद सभी नाविकों, जहाज आदि की तट पर वापसी सुनिश्चित करने के लिए भी कहा ताकि किसी की भी जिंदगी खतरे में न पड़े. इस बैठक में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार, पुडुचेरी के मुख्य सचिव और अधिकारियों ने भाग लिया.

तूफान यास के खतरे को देखते हुए दक्षिण पश्चिम रेलवे हाई अलर्ट पर है. रेलवे ने एक दर्जन ट्रेनों को 24 से 26 मई तक रद्द कर दिया है. इसमें बंगाल और ओडिशा की ट्रेनें शामिल हैं.

जहां तक फूल लाल चां या चंद्र ग्रहण की बात है, तो यह खगोलीय घटना पहले से निर्धारित है. इस दौरान, पृथ्वी सूर्य के प्रकाश और चंद्रमा के बीच आ जाती है. इसका मतलब है कि रात के समय, जैसे ही पृथ्वी की छाया इसे ढंक लेती है, चंद्रमा गायब हो जाता है. चंद्रमा भी लाल दिख सकता है क्योंकि पृथ्वी का वातावरण अन्य रंगों को अवशोषित करता है जबकि यह चंद्रमा की ओर कुछ सूर्य के प्रकाश को झुकाता है. सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में झुकता है और अन्य रंगों को अवशोषित करता है, यही कारण है कि सूर्यास्त नारंगी और लाल होते हैं. पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी पर होने वाले सभी सूर्योदय और सूर्यास्त से चमकता है.

इसी तरह फुल मून यानी पूर्णिमा की रात चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होती है. इसका प्रकाशित भाग पृथ्वी से पूरी तरह से दिखाई देता है. दो-तीन रातों तक चन्द्रमा आंखों को पूर्ण दिखाई देता है. हालांकि, खगोलविद चंद्रमा की उस स्थिति को फुल मून मानते हैं, जब चंद्रमा अण्डाकार देशांतर में सूर्य के ठीक 180 डिग्री विपरीत होता है. यह फुल मून की विशेषता है. तथ्य यह है कि यह सूर्य के विपरीत होता है जैसा कि पृथ्वी से देखा जाता है. वह पूर्ण और गोल दिखती है.

याद रखें कि आधा चांद हमेशा सूर्य से प्रकाशित होता है. वह प्रकाशित आधा चंद्रमा का दिन की तरफ होता है. पृथ्वी पर हमें पूर्ण दिखाई देने के लिए, हमें चंद्रमा का पूरा दिन देखना होगा. ऐसा तभी होता है जब चंद्रमा हमारे आकाश में सूर्य के विपरीत होता है. इसलिए फुल मून पूरा दिखती है क्योंकि यह सूर्य के विपरीत है.

यही कारण है कि हर पूर्णिमा सूर्यास्त के आसपास पूर्व में उगता है. सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच सबसे ऊपर चढ़ता है और सूर्योदय के आसपास डूबता होता है. अब इस खगोलीय घटना से समुद्र में आने वाले ज्वार के बीच चक्रवाती तूफान यास के खतरे से सावधान रहने के साथ ही निबटने की फिलहाल केवल तैयारियां ही की जा सकती हैं.
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