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जानें क्या होती है मानसिक बीमारी? इससे बचने के लिए करें ये उपाय

जानें क्या होती है मानसिक बीमारी? इससे बचने के लिए करें ये उपाय मनुष्य के शरीर की सारी कार्यप्रणाली उसके मस्तिष्क पर ही निर्भर करती है। हर एक छोटे-से छोटा काम हो या चाहे फिर कोई बड़ा काम, सारे फैसले दिमाग के जरिए ही होते हैं. कभी-कभी दिमाग की कार्य क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है और लोगों को किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी का सामना करना पड़ता है. इस दौरान लोगों के कार्य करने की क्षमता के साथ-साथ उनके व्यवहार और उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ भी बुरी तरह प्रभावित हो जाती है. यह मेंटल हेल्थ से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिससे बचे रहना बहुत जरूरी है. यहां आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा रही है. साथ ही आपको यह भी बताया जा रहा है कि आप इसकी चपेट में आने से बचे रहने के लिए क्या-क्या उपाय अपना सकते हैं.

 क्या होती है मानसिक बीमारी?

मानसिक स्वास्थ्य में हमारे भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण (emotional, psychological, and social well-being) शामिल हैं. यह प्रभावित करता है कि हम कैसे सोचते हैं, महसूस करते हैं और कार्य करते हैं. आपका मानसिक स्वास्थ्य उम्र बढ़ने के साथ बदलता चला जाता है. अपने जीवन के दौरान, अगर आप मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव करते हैं तो इसके बारें में जानना, डॉक्टर की मदद लेना और इलाज करवाना बेहद जरूरी है क्योंकि ये आपकी सोच, मनोदशा और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे कई अन्य कारण भी हैं, जो कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान करते हैं, जिनमें शामिल हैं:

-जैविक कारक (Biological factors),
जैसे कि जीन या मस्तिष्क रसायन -मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का पारिवारिक इतिहास (Family history of mental health problems)
-जीवन के अनुभव, जैसे आघात या तकलीफ (Life experiences, such as trauma or abuse)
-जीवन में अवसाद रूपी वातावरण के कारण (Depressive Environment)
-बचपन का आघात लगने के कारण (Childhood trauma)
-तनावपूर्ण घटनाएं जैसे किसी प्रियजन को खोने के कारण (Stressful events of life)
-नकारात्मक विचारों के बढ़ने के कारण (Negative thoughts)
- अनहेल्दी आदतों जैसे कि पर्याप्त नींद न लेना या खराब खान-पान की वजह से (unhealthy lifestyle)
- ड्रग्स और अल्कोहल का दुरुपयोग से( Abusing drugs and alcohol)
-एक लंबी बीमारी के उपचार के बाद (treatment with a chronic disease)

मानसिक बीमारी के लक्षण -  Symptoms of Mental Illness

प्रत्येक मानसिक बीमारी के अपने-अपने लक्षण होते हैं। हालांकि, कुछ सामान्य चेतावनी संकेत या लक्षण हैं जो आपको सचेत कर सकते हैं कि आपको किसी को पेशेवर मदद की आवश्यकता है. जैसे कि
-ज्यादा सोचना (Over thinking)
-एंग्जायटी और घबराहट (Anxiety)
- व्यक्तित्व परिवर्तन (marked personality change)
-खाने या सोने के पैटर्न में बदलाव (changes in eating or sleeping patterns)
-समस्याओं और दैनिक गतिविधियों को करने में असमर्थता (inability to cope with problems and daily activities)
-ज्यादा चिंता करना (excessive anxieties)
-लंबे समय तक अवसाद और उदासीनता (prolonged depression and apathy)
- ज्यादा गुस्सा करना या हिंसक व्यवहार करना (excessive anger or violent behavior)
-आत्महत्या के बारे में सोचना या खुद को नुकसान पहुंचाना (thinking or talking about suicide)
-बहुत ज्यादा मूड स्विंग्स होना (extreme mood swings)
-शराब या ड्रग्स का दुरुपयोग (abuse of alcohol or drugs)

इसका मेंटल हेल्थ से कैसा जुड़ाव है ?

मानसिक बीमारी हमारे मानसिक स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।.मेंटल हेल्थ की बात करें तो इसमें इमोशनल, साइक्लोजिकल और सोशल वेल बीइंग जैसे बिंदु शामिल हैं. हमारा मानसिक स्वास्थ्य इस बात पर प्रभाव डालता है कि हम कैसे सोचते हैं, हम क्या महसूस करते है और कैसे हम चीजों को याद करते हैं. इतना ही नहीं, यह हमें स्ट्रेस मैनेजमेंट के साथ-साथ हमारी पसंद और नापसंद पर भी सक्रिय रहता है. मेंटल हेल्थ हमारी जिंदगी में बचपन से शुरू होकर युवावस्था और बुढ़ापे तक के सफर को प्रभावित करता है.

मेंटल हेल्थ हमारी सेहत को कैसे प्रभावित करती है ?

मेंटल हेल्थ हमारे पूरे स्वास्थ्य पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणाम दिखाती है। बशर्ते यह बात इस पर निर्भर करती है कि हमारी मेंटल हेल्थ कितना ठीक तरह से काम करती है और कितनी ठीक तरह से नहीं। उदाहरण के लिए देखा जाए तो मेंटल हेल्थ से जुड़ी कुछ समस्याएं जैसे डिप्रेशन के कारण हमें कई प्रकार की फिजिकल हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है। इसके अलावा अगर यह लंबे समय तक बना रहे तोस्ट्रोक, टाइप टू डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।

मेंटल हेल्थ पर क्यों पड़ता है नकारात्मक प्रभाव

मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक प्रभाव कई कारणों से पड़ सकता है जो बचपन से शुरू होकर किसी भी स्टेज में आप इसकी चपेट में आ सकते हैं. ट्रॉमा, चाइल्ड अब्यूज, सेक्सुअल असॉल्ट विटनेसिंग वॉयलेंस के कारण मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या हो सकती है. इसके अलावा कुछ बीमारियां जैसे कैंसर, डायबिटीज और दिमाग में होने वाले केमिकल इंबैलेंस भी मेंटल हेल्थ को बुरी तरह से प्रभावित करता है.

बचने के लिए क्या कर सकते हैं उपाय

मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई किसी भी प्रकार की समस्या से बचे रहने के लिए सबसे पहले आपको अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि आप किसी भी प्रकार की बीमारी से सुरक्षित रहें. किसी भी बीमारी से ग्रसित होने के कारण लगातार आप उस बारे में भी सोचते रह सकते हैं और आप के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव ही हावी रहेगा जिसकाअसर मेंटल हेल्थ पर बुरा साबित होगा.

किसी भी चीज के बारे में ज्यादा न सोचें

किसी भी ऑफिशियल काम या फिर घर की किसी भी बात के बारे में इतना ज्यादा ना सोचें कि वह बात आपके दिमाग पर हावी रहे और आप उसके कारण लगातार परेशान रहें. आप अपने काम को गंभीरतापूर्वक करें और कोशिश करें कि आप किसी भी प्रकार की टेंशन को दिमाग में ना रखें. इस कारण आपकी मेंटल हेल्थ स्वस्थ बनी रहेगी.

किस प्रकार की डायट रहेगी सबसे बढ़िया

मेंटल हेल्थ से जुड़ी हुई किसी भी प्रकार की समस्या से बचे रहने के लिए आपको ब्रेन बूस्टर फूड्स का सेवन करना चाहिए. इन फूड्स में नट्स, डार्क चॉकलेट, पंपकिन सीड्स, ब्रोकली, हल्दी, ब्लूबेरी, फैटी फिश जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं. इनका आप नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं जो आपकी मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने में काफी मदद करेंगे.

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां -Mental Health Disorders

1. एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders)
एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders) मानसिक बीमारी का सबसे आम प्रकार ह.। इन स्थितियों वाले लोगों में गंभीर भय या चिंता होती है, जो कुछ वस्तुओं या स्थितियों से संबंधित होती है. एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार (Types of Anxiety Disorders) भी हैं, जैसे कि

a. सामान्यीकृत चिंता विकार (Generalized anxiety disorder)
सामान्यीकृत चिंता विकार में लगातार और अत्यधिक चिंता शामिल होती है जो दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करती है. यह चल रही चिंता और तनाव शारीरिक लक्षणों के साथ हो सकता है, जैसे कि बेचैनी, किनारे पर महसूस करना या आसानी से थकावट, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, मांसपेशियों में तनाव या नींद की समस्या.

b. घबराहट की समस्या (Panic Disorder)
पैनिक डिसऑर्डर का मुख्य लक्षण बार-बार होने वाले पैनिक अटैक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक संकट का एक जबरदस्त संयोजन है. इसके कई लक्षण हैं जैसे कि

-तेज दिल की धड़कन
-पसीना आना
-थरथर कांपना या हिलाना
-सांस की तकलीफ महसूस करना
 -छाती में दर्द
-चक्कर आना
-या बेहोश होना
-घुटन का अहसास
-स्तब्ध हो जाना या झुनझुनी
-ठंड लगना
 -मतली या पेट में दर्द
-मरने का डर
c. फोबिया (Phobias)
फोबिया एक विशिष्ट वस्तु, स्थिति या गतिविधि का अत्यधिक और लगातार भय है जो आमतौर पर हानिकारक होता है. मरीजों को यह पता होने के बावजूद की उनका डर अत्यधिक है, वे इसे दूर नहीं कर पाते हैं.

d. भीड़ से डर लगना (Agoraphobia)
एगोराफोबिया उन स्थितियों में होने का डर है जहां से बचना मुश्किल या शर्मनाक हो सकता है. ये डर वास्तविक स्थिति बहुत परेशान करता है और कामकाज में समस्याएं पैदा करता है. एग्रोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति इस डर का अनुभव कई स्थितियों में करता है जैसे कि

-सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना-खुले स्थानों में होने पर- भीड़ वाले स्थानों में होना-लाइन में खड़ा होने पर,घर के बाहर अकेले रहने पर
e. सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (Social Anxiety Disorder)
सामाजिक चिंता विकार वाले व्यक्ति को शर्मिंदगी, अपमानित, अस्वीकार किए जाने या सामाजिक संबंधों में कमी को लेकर डर रहता है. इस विकार वाले लोग स्थिति से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर जानें, बोलने नए लोगों से मिलने और सार्वजनिक रूप से खाने पीने से अत्यधिक डरते हैं.

f. अलगाव की चिंता (Separation Anxiety Disorder)

अलगाव चिंता विकार वाले लोगों को अपने लोगों से बिछड़ने का डर रहता है. ऐसे लोग घर से बाहर जाने या उस व्यक्ति के बिना बाहर जाने से इनकार कर सकते है, या अलगाव के बारे में बुरे सपने का अनुभव कर सकते है. ये परेशानी बचपन में विकसित होते हैं, लेकिन लक्षण वयस्क होने के बाद भी रह सकते हैं.

2. मूड डिसऑर्डर  (Mood disorders)
मूड डिसऑर्डर को भी भावात्मक विकारों या अवसादग्रस्तता विकारों के रूप में संदर्भित किया जा सकता है. इन स्थितियों वाले लोगों के मनोदशा में बहुत जल्दी बदलाव आता रहता है. इसके भी कई प्रकार होते हैं, जैसे कि

a. मेजर डिप्रेशन (Major depression)
इस अवसाद के साथ एक व्यक्ति लगातार लो फिल करता है और उसका मूड हमेशा खराब रहता है और उन गतिविधियों और घटनाओं में रुचि खो देता है जो पहले से आनंद लेते थे. वे लंबे समय तक निराश या अत्यधिक उदास महसूस करता है.

b. बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar disorder)
बाइपोलर डिसऑर्डर या द्विध्रुवी विकार वाला व्यक्ति अपने मनोदशा, ऊर्जा के स्तर, गतिविधि के स्तर और दैनिक जीवन को जारी रखने की क्षमता में असामान्य परिवर्तन का अनुभव करता है. अच्छा महसूस करने पर वो बहुत ज्यादा एनर्जेटिक हो जाते हैं, जबकि लो मूड होने पर अवसाद में चले जाते हैं.

c. मौसमी भावात्मक विकार (Seasonal affective disorder )
सर्दियों और शुरुआती वसंत महीनों के दौरान जब दिन का छोटा होता है या ज्यादा अंधेरा होता है, तो ये कुछ लोगों को डिप्रेशन में डाल सकता है. ऐसे लोगों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि वे एक बेहतर लाइटिंग या सूर्य की रोशनी वाले कमर में रहें.

3. सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia disorders)
सिजोफ्रेनिया एक या कई मानसिक बीमारियों का एक समूह है जिसे समझना काफी मुश्किल है. सिजोफ्रेनिया के लक्षण आमतौर पर 16 से 30 साल की उम्र के बीच विकसित होते हैं. ऐसे व्यक्ति के विचार कई बार टूटे हुए और खोए हुए से होते हैं. ये लोग उन चीजों को भी अपने आस पास महसूस करते हैं, जो कि सच में दुनिया में है ही नहीं. सिजोफ्रेनिया में भ्रम, विचार विकार और मतिभ्रम शामिल हैं.

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय- Tips for good mental health

-दूसरों से जुड़े रहें और अपने आप को अलग न समझें.पॉजिटिव सोचें. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. दूसरों की मदद करते रहें. पर्याप्त नींद लें और समय पर सोएं और समय से जागें. हेल्दी डाइट लें खास कर मूड को बेहतर बनाने वाली चीजें खाएं. शराब, धूम्रपान और ड्रग्स से बचें. खूब धूप लें. तनाव ज्यादा न लें. बहुत ज्यादा सोचना बंद करें. एक्सरसाइज और योग करें. ऐसा कुछ करें जिससे आपका मन लगा रहे और आप खुश रहें. मिलनसार बनें.
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