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शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन लगातार महिलाओं व किशोरी बालिकाओं को कर रहा प्रोत्साहित, जानिए क्या?

जनता जनार्दन संवाददाता , Nov 28, 2020, 19:32 pm IST
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शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन लगातार महिलाओं व किशोरी बालिकाओं को कर रहा प्रोत्साहित, जानिए क्या?
वाराणसी: लैंगिक असमानता और जेंडर स्टीरियोटाइप से उत्पन्न समस्याओं जैसे- लैंगिक भेदभाव, महिला उत्पीड़न आदि के निवारण में महिलाओं से अधिक पुरुषों को बचपन से ही संवेदित करने की आवश्यकता है, ताकि समाज में पितृ सत्तात्मक व्यवस्था की गहरी जड़ों को उखाड़ फेंका जा सके | उक्त विचार सामाजिक कार्यकर्ता श्री अजित सिंह ने व्यक्त किये | वे डॉ.शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन (एस.आर.एफ.) के द्वारा मिशन शक्ति के तहत अपनी सहयोगी संस्थाओं चाइल्ड राइट्स एण्ड यू (क्राई) एवं केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय) के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा विरोधी दिवस 25 नवम्बर से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस 10 दिसम्बर तक आयोजित महिला हिंसा विरोधी पखवारे के अंतर्गत अम्बेडकरनगर, दानियालपुर, जवाहरनगर (सारनाथ) और अमरपुर (शैलपुत्री) बस्तियों में शक्ति संयोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत सामुदायिक गोष्ठियों को संबोधित कर रहे थे | 
 
गोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था की सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री अन्नपूर्णा सिंह ने कहा कि “संविधान, कानून एवं सरकार की तमाम योजनाओं में महिला समानता एवं सशक्तिकरण के लिए अनेकानेक उपाय किये गये है, किन्तु फिर भी समाज में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है | हम एक तरफ महिलाओं को देवी स्वरुप में पूजने की बात करते है किन्तु वहीँ दूसरी तरफ लैंगिक भेदभाव, दहेज़ उत्पीड़न, घरेलू, शारीरिक, मानसिक व यौन हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न आदि का दंश भी देते रहते हैं | ऐसी स्थिति से निबटने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लिए भी साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है |” उन्होंने आह्वान किया कि महिलाएं किसी भी प्रकार की गैर बराबरी, हिंसा, शोषण और उत्पीड़न पर चुप न रहे, बल्कि इनके विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठायें ताकि ऐसा करने वालों को उचित सबक मिल सके | 
      
संस्था द्वारा संचालित ख़ुशी परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर्स सुश्री सुधा गुप्ता एवं काजलप्रिया द्वारा केंद्र में आने वाले प्रकरणों व उनके समाधान हेतु किये जा रहे प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया | संस्था के सामाजिक कार्यकर्ता शुभम मौर्या ने विभिन्न कारणों से हो रहे पारिवारिक विघटन के कारण बढ़ती घरेलू हिंसा और उनका किशोर-किशोरियों और बच्चों पर पड़ते दुष्प्रभाव की चर्चा करते हुए सभी से उनको संरक्षित करने की अपील की | क्राई समर्थित बाल अधिकार संरक्षण कार्यक्रम क्षेत्र सुगम कार्यकर्ताओं दीक्षा सिंह, दीपिका भट्टाचार्या तथा चेतना सिंह ने भी लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के प्रति विभिन्न प्रकार के उत्पीड़नों की चर्चा करते हुए उनके निवारण हेतु किये जा रहे प्रयासों तथा समुदाय में इसके विरुद्ध उठाये जा रहे क़दमों की चर्चा की, ताकि ऐसी घटनाओं पर घर के अंदर से ही अंकुश लगाया जा सके | 
       
संस्था द्वारा स्थापित शक्ति समूह की किशोरियों क्रमशः शिवानी, पूनम, कोमल आदि ने सरकार द्वारा संचालित शक्ति मिशन के अंतर्गत माननीय मुख्यमंत्री से अपील की वे महिलाओ व किशोरियों के सुरक्षा, सम्मान व स्वालंबन के सम्बन्ध में सिर्फ किशोरियों व महिलाओं तक ही जानकारी व जागरूकता सीमित न रखते हुए किशोरों और पुरुषों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित कराने हेतु पहल करें कि महिलाओं और बच्चियों के हित में बने कानून का उलंघन करने वाले किस प्रकार से दण्डित हो सकते हैं | साथ ही बालिकाओं और महिलाओं का सम्मान करने वाले पुरुषों को सम्मानित कर समाज में एक उदाहरण भी प्रस्तुत कराएं | बालिकाओं ने कहा कि शक्ति मिशन तभी सफल होगा जब इसमें पुरुषों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित होगी | अतः स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालयों में सर्फ लड़कियों तक ही नहीं बल्कि किशोरों व युवाओं के बीच भी सरकार की योजनाओं की जानकारी जरुर पहुंचाई जाए | साथ ही जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी, आशा, ए.एन.एम कार्यकर्तियाँ अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अपने कार्य के दौरान बालिका एवं महिला हिंसा की घटनाओं को गंभीरता से संज्ञान में लें और सम्बंधित अधिकारियों को प्रेषित करें | ताकि समय से घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके | इसके लिए पंचायतों व स्थानीय निकाय के प्राधिकारियों की जिम्मेदारी व जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए |
        
इस अवसर पर समुदाय में महिलाओं एवं बालिकाओं को सम्मानित व प्रोत्साहित करने वाले युवाओं व पुरुषों सर्व श्री हीरालाल, भरत, त्रिभुवन प्रसाद आदि को समुदाय के लिए रोल मॉडल के रूप में सम्मानित किया गया | इस अवसर पर माता प्रसाद, जमुना प्रसाद, चुनरी देवी, इम्तियाज अली, गुड़िया आदि लोग उपस्थित रहे | 
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