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डॉ.शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन के तत्वाधान में महिला हिंसा विरोधी पखवारे का शुभारम्भ हुआ

अमिय पाण्डेय , Nov 26, 2020, 17:15 pm IST
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डॉ.शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन के तत्वाधान में महिला हिंसा विरोधी पखवारे का शुभारम्भ हुआ
Varanasi: “चुप्पी तोड़ो – हक़ से बोलो” के नारे के साथ महिला हिंसा विरोधी पखवारे का शुभारम्भ हुआ | डॉ.शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन (एस.आर.एफ.) द्वारा मिशन शक्ति के तहत अपनी सहयोगी संस्थाओं चाइल्ड राइट्स एण्ड यू (क्राई) एवं केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय) के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा विरोधी दिवस 25 नवम्बर से अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस 10 दिसम्बर तक आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्था के सोनिया स्थित आचार्य नरेन्द्रदेव सभागार में एक शक्ति संयोजन कार्यक्रम के माध्यम से हुआ.

कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए संस्था की कार्यक्रम निदेशिका डॉ.रोली सिंह ने कहा कि “संविधान, कानून एवं सरकार की तमाम योजनाओं में महिला समानता एवं सशक्तिकरण के लिए अनेकानेक उपाय किये गये है, किन्तु फिर भी समाज में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है | हम एक तरफ महिलाओं को देवी स्वरुप में पूजने की बात करते है किन्तु वहीँ दूसरी तरफ लैंगिक भेदभाव, दहेज़ उत्पीड़न, घरेलू, शारीरिक, मानसिक व यौन हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न आदि का दंश भी देते रहते हैं | ऐसी स्थिति से निबटने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लिए भी साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है |” उन्होंने आह्वान किया कि महिलाएं किसी भी प्रकार की गैर बराबरी, हिंसा, शोषण और उत्पीड़न पर चुप न रहे, बल्कि इनके विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठायें ताकि ऐसा करने वालों को उचित सबक मिल सके | 
       
कार्यक्रम में आपबीती प्रस्तुत करते हुए खोजवां की अनिशा (परिवर्तित नाम) ने अपने ससुराल जनों द्वारा उत्पीड़न का मुद्दा उठाते हुए खुद के द्वारा किये जा रहे संघर्ष की कहानी बयां की | सिगरा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित परिवार की पूर्व अध्यापिका सुश्री मंजूलता ने अपने सौतेले पुत्र द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न की दास्तां सुनाई और साथ ही उसके विरुद्ध किये जा रहे विधिक कार्यवाही की जानकारी प्रदान की | इसी प्रकार चौकाघाट, ढेलवरिया की नीना (परिवर्तित नाम), ककरमत्ता क्षेत्र की अनीता (परिवर्तित नाम), शैलपुत्री क्षेत्र की रिंकी (परिवर्तित नाम) आदि ने भी अपने विरुद्ध हुए उत्पीड़न और इसके विरुद्ध स्वयं द्वारा किये जा रहे संघर्ष की कहानी सबके साथ साझा की | संस्था द्वारा संचालित ख़ुशी परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर्स सुश्री सुधा गुप्ता एवं काजलप्रिया द्वारा केंद्र में आने वाले प्रकरणों व उनके समाधान हेतु किये जा रहे प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया | संस्था द्वारा संचालित धूपछाँव खुला आश्रय गृह की सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री अन्नपूर्णा सिंह ने विभिन्न कारणों से हो रहे पारिवारिक विघटन के कारण बढ़ती घरेलू हिंसा और उनका किशोर-किशोरियों और बच्चों पर पड़ते दुष्प्रभाव की चर्चा करते हुए सभी से उनको संरक्षित करने की अपील की | क्राई समर्थित बाल अधिकार संरक्षण कार्यक्रम क्षेत्र सुगम कार्यकर्ताओं दीक्षा सिंह, दीपिका भट्टाचार्या, चेतना सिंह, अजित सिंह एवं शुभम मौर्या ने भी लैंगिक भेदभाव और महिलाओं के प्रति विभिन्न प्रकार के उत्पीड़नों की चर्चा करते हुए उनके निवारण हेतु किये जा रहे प्रयासों तथा समुदाय में इसके विरुद्ध उठाये जा रहे क़दमों की चर्चा की ताकि ऐसी घटनाओं पर घर के अंदर से ही अंकुश लगाया जा सके | अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था की अध्यक्ष एवं ख्यात मानवाधिकार अधिवक्ता एड.विजयश्री सिंह ने कहा कि “किशोरियों को प्रारम्भ से ही किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव एवं हिंसा से लड़ने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार करने के लिए परिवार, विद्यालय एवं समाज में प्रारम्भ से ही उन्हें तैयार करना चाहिए ताकि बड़े होकर वे अपने संतानों के साथ भी इसी प्रकार उन्हें तैयार कर सके और समाज में जड़ से इस समस्या को उखाड़ फेंका जा सके | 
       
संस्था द्वारा स्थापित शक्ति समूह की किशोरियों ने सरकार द्वारा संचालित शक्ति मिशन के अंतर्गत माननीय मुख्यमंत्री से अपील की वे महिलाओ व किशोरियों के सुरक्षा, सम्मान व स्वालंबन के सम्बन्ध में सिर्फ किशोरियों व महिलाओं तक ही जानकारी व जागरूकता सीमित न रखते हुए किशोरों और पुरुषों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित कराने हेतु पहल करें कि महिलाओं और बच्चियों के हित में बने कानून का उलंघन करने वाले किस प्रकार से दण्डित हो सकते हैं | साथ ही बालिकाओं और महिलाओं का सम्मान करने वाले पुरुषों को सम्मानित कर समाज में एक उदाहरण भी प्रस्तुत कराएं | बालिकाओं ने कहा कि शक्ति मिशन तभी सफल होगा जब इसमें पुरुषों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित होगी | अतः स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालयों में सर्फ लड़कियों तक ही नहीं बल्कि किशोरों व युवाओं के बीच भी सरकार की योजनाओं की जानकारी जरुर पहुंचाई जाए | साथ ही जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी, आशा, ए.एन.एम कार्यकर्तियाँ अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अपने कार्य के दौरान बालिका एवं महिला हिंसा की घटनाओं को गंभीरता से संज्ञान में लें और सम्बंधित अधिकारियों को प्रेषित करें | ताकि समय से घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके | इसके लिए पंचायतों व स्थानीय निकाय के प्राधिकारियों की जिम्मेदारी व जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए |
       
अन्त में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्था के महासचिव एवं मुख्य कार्यकारी श्री राजीव कुमार सिंह ने उक्त समस्याओं के निवारण में महिलाओं से अधिक पुरुषों को बचपन से ही संवेदित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि समाज में पितृ सत्तात्मक व्यवस्था की गहरी जड़ों को उखाड़ फेंका जा सके | कार्यक्रम में सर्व श्री चन्द्रबलि चौबे, शशि प्रकाश सिंह, सरोज सिंह, शुभम मौर्या, हर्षित कुमार सिंह, राजन कुमार, श्वेता सिंह, सुषमा चौबे, बीना सिंह, अंजू आदि मौजूद थी | पखवारे के अन्तर्गत आगामी दिनों में संस्था की विभिन्न बस्तियों एवं गाँव में प्रभातफेरी, जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जाएगा | 
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