चंदौली: विद्युत अधिनियम 2003 प्रतिगामी संशोधन के विरोध में कार्य से विरत रहे बिजली कर्मी 

चंदौली: विद्युत अधिनियम 2003 प्रतिगामी संशोधन के विरोध में कार्य से विरत रहे बिजली कर्मी 
चंदौली: केन्द्र सरकार द्वारा आगामी बजट सत्र में देश के सभी राज्यों के सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत निगमों/परिषदों को नीजि क्षेत्र में दिये जाने हेतु वर्ष 2003 में पारित विद्युत अधिनियम 2003 में बड़े पैमाने पर संशोधन किये जाने के संकेत ने उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश के 15 लाख बिजली कामगारों को झकझोर कर रख दिया है।सरकार के प्रस्तुत प्रस्ताव की भनक मात्र मिलते ही देश के सभी राज्यों के बिजली कामगार बुधवार को एक दिन के आम हड़ताल पर रहे जिसके समर्थन में वर्षों से नीजिकरण की व्यथा झेल रहे उ.प्र. पावर कार्पोरेशन के कर्मचारियों ने भी बुधवार को कार्य से विरत हो प्रातः 8 बजे से 24 घन्टे का कार्य बहिष्कार कर हर जिलों के मुख्यालय पर धरने पर थे।धरनारत बिजली कर्मियों का खुला आरोप है कि सरकार विद्युत अधिनियम 2003 में संशोधन कर मुनाफे का सौदा कर नीजि घरानों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है.
 
जनपद के गोधना स्थित विद्युत वितरण मन्डल कार्यालय पर धरनारत कार्मिकों ने एक स्वर में प्रधानमंत्री से देश हित में उक्त प्रतिगामी विद्युत अधिनियम संशोधन बिल के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिये जाने की मांग की। धरना स्थल पर आहूत सभा को सम्बोधित करते हुए अध्यक्षता कर रहे संजीवधर दूबे ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 में प्रस्तावित संशोधन देश के गरीबों,किसानों अथवा निर्बल तथा असहाय लोगों के हित में नहीं है प्रस्तावित संशोधन बिल से पूँजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और निर्धन और असहाय तबको का दमन तथा शोषण होगा जिससे प्रदेश में अराजकता और असन्तोष का वातावरण कायम होगा। वक्ताओं ने सरकार द्वारा बार बार घाटे का रोना रोने के बाबत कहा कि पिछले बीस वर्षों से समय समय पर विभिन्न सरकारों द्वारा उपभोक्ताओं को तमाम निःशुल्क और ब्याज माफी जैसी आकर्षक योजनाओं के माध्यम से प्रलोभन दे रही है जिससे हो रहे घाटे की भरपाई के बजाय बढ़ते घाटे का हर सम्भव ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ा जा रहा है। धरने से दावा करते हुए नेताओं ने कहा कि  सरकार की योजनाओं को बेहतर ढंग से प्रदेश के जन जन तक पहुँचाना हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है सरकार के आदेश के अनुपालन से हो रहे घाटे की शत प्रतिशत जिम्मेदारी खुद सरकार की है जिसके लिए विद्युतकर्मियों के कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी पर किसी भी दृष्टिकोण से प्रश्नचिन्ह खड़ा किया जाना सर्वथा अनुचित हैं अतः प्रस्तावित प्रतिगामी संशोधन विद्युत अधिनियम 2003 को वापस लिया जाना देश हित में होगा। 
 
सभा को सर्वश्री प्रवीन कुमार सिंह,अंकुर पान्डेय,मो. मेंहदी, नरेन्द्र गोपाल शुक्ला,सर्वेश पान्डेय,ए के शुक्ला,जयकार पटेल,सतीश,ए के पान्डेय, अफसार,मनोज यादव,निरंजन कुमार, घनश्याम,आनन्द कुमार, हंसराज,अनिलकुमार आदि नेताओ ने सम्बोधित किया। अध्यक्षता संजीवधर दूबे तथा संचालन राजमणि वर्मा ने की। 
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