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मिस्र के बाद अब तुर्की से भी प्याज आयात करेगी सरकार

जनता जनार्दन संवाददाता , Dec 01, 2019, 19:03 pm IST
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मिस्र के बाद अब तुर्की से भी प्याज आयात करेगी सरकार

दिल्ली: देश में प्याज के दाम को लेकर हाहाकार मचा है. खुले बाजार में प्याज 80 से 100 रुपए किलो तक बिक रहा है. सरकारी आंकड़ों को ही मानें तो दिल्ली में प्याज 76 रुपये जबकि मुंबई में 82 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है प्याज की सप्लाई काफी कम होना.

तुर्की से प्याज मंगाने का फैसला
सप्लाई की इसी कमी को दूर करने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 11000 मीट्रिक टन प्याज आयात करने का फैसला किया है. मंत्रालय ने सरकारी कंपनी एमएमटीसी को इसके लिए निर्देश जारी किए हैं. सूत्रों के मुताबिक, एमएमटीसी ने जल्द प्याज मंगाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है. हालांकि प्रक्रिया पूरी करके प्याज के भारत पहुंचने में कम से कम तीन हफ्ते का वक्त लग सकता है. सूत्रों के मुताबिक प्याज का ये खेप 20 दिसंबर के बाद भारत पहुंचने लगेगा जिसके बाद इसे घरेलू बाजार में बेचा जा सकेगा.

 

मिस्र से प्याज मंगाने का दिया जा चुका है ऑर्डर
इससे पहले सरकार ने मिस्र से भी प्याज मंगाने का फैसला किया था. इसके तहत एमएमटीसी ने 6090 मीट्रिक टन प्याज मंगाने का ऑर्डर दिया था. हालांकि मिस्र से भी प्याज को भारत पहुंचने में अभी भी करीब 10 दिनों का समय लगेगा. उपभोक्ता मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक मिस्र से आने वाली प्याज की पहली खेप 12 दिसंबर को मुंबई पहुंचेगी.

 

कुछ दिन और रूलाएगी प्याज की कीमत
जाहिर है प्याज की कीमत अभी कम होती नहीं दिखती. उपभोक्ता मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगर मिस्र से आनेवाला प्याज अपने नियत समय पर भी भारत पहुंचता है फिर भी कीमत कम होने में करीब दो हफ्ते का समय लग जाएगा. हालांकि राहत की बात ये है कि रबी के मौसम में बोया जाने वाला घरेलू प्याज दिसंबर के मध्य तक बाजार में पहुंचने लगेगा जिससे कीमत में तेजी से गिरावट आने की संभावना है.

कृषि मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अगर मौसम की मार फिर नहीं पड़ी तो रबी के प्याज का बंपर उत्पादन होने की संभावना है. दरअसल, खरीफ के मौसम में बोया जाने वाला प्याज नवंबर के पहले हफ्ते से बाजार में पहुंचने लगता है लेकिन महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रमुख प्याज उत्पादन करने वाले राज्यों में बेमौसम बरसात से काफी नुकसान हुआ और उत्पादन में 26 लाख टन की कमी हो गयी.

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