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नाथूलाः डोकलाम तक पहुंचने में सेना को लगेंगे सिर्फ 40 मिनट

जनता जनार्दन संवाददाता , Oct 03, 2019, 21:13 pm IST
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नाथूलाः डोकलाम तक पहुंचने में सेना को लगेंगे सिर्फ 40 मिनट

नाथूला: डोकलाम में चीन फिर से कोई नई चाल ना चल दे इसके लिए भारत ने सामरिक तौर से महत्वपूर्ण तीन नई सड़कें बना ली हैं. अब भारतीय सैनिकों को डोकलाम पहुंचने में महज 40 मिनट लगते हैं. जबकि पहले डोकलाम पहुंचने में 4-5 घंटे लगते थे वो भी पैदल या फिर खच्चर पर. साथ ही एबीपी न्यूज को जानकारी मिली है कि डोकलाम में हर रोज भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स सुबह एक साथ चाय पीते हैं ताकि डोकलाम में शांति बनी रहे.

सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए बॉर्डर पर्सनैल मीटिंग यानि बीपीएम मीटिंग की कवरेज के दौरान एबीपी न्यूज को डोकलाम में भारत की सैन्य तौर से मजबूत स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी हाथ लगी है. डोकलाम में फिर से चीन अपनी कोई नई चाल चल दे इसके लिए भारतीय सेना ने बीआरओ यानि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाईजेशन के साथ मिलकर तीन नई सड़कों का काम शुरू किया है.

एक रोड पूरी तरह से तैयार है
सिक्किम में बीआरओ के कमांडर अशोक गुप्ता ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत में बताया कि इनमें से एक रोड‌ पूरी तरह से तैयार है. ये सड़क सिक्किम की राजधानी गंगटोक से नाथूला बॉर्डर तक जाने वाले हाईवे के करीब बाबा हरभजन मंदिर से सटे कूपूप (Kuppup) से सीधे डोकला पास (दर्रे) तक जाती है. डोकलाम विवाद से पहले ये एक कच्चा ट्रैक था और सैनिक कूपूप से डोकलाम पहुंचने के लिए पैदल या फिर खच्चर का सहारा लेते थे. यहां से डोकाला पास पहुंचने में चार से पांच घंटे लगते थे. लेकिन अब यहां पक्की सड़क बन गई है जो भीमबेस से होकर गुजरती है और गाड़ी से मात्र 40 मिनट में सैनिक डोकलाम प्लैटियू तक पहुंच सकते हैं. कोलतार से बनी इस सड़क पर टैंक भी दौड़ सकते हैं.

भारतीय सेना के लिए डोकला दर्रा ही डोकलाम प्लैटियू तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता
आपको बता दें कि भारतीय सेना के लिए 13 हजार फीट की ऊंचाई पर डोकला दर्रा ही डोकलाम प्लैटियू (पठार) तक पहुंचने का रास्ता है. करीब दो साल पहले यानि 16 जून 2017 को चीन ने चुंबी वैली से होकर एक सड़क‌ डोकलाम में बनाने की कोशिश की थी. चीन का मकसद‌ इस सड़क को भूटान की जाम्फेरी रिज़ तक बनाने का था ताकि भारत के बेहद ही संवदेनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चीन निगरानी रख सके. डोकला दर्रे पर तैनात भारतीय सैनिकों ने चीन की इस सड़क को तोरसा नाला से आगे बढ़ने पर इतराज जताया था जिसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच 72 दिन लंबा फेसऑफ चला था. आखिरकार चीन की सेना पीछे हट गई थी और सड़क भी नहीं बनाई थी. डोकलाम के लिए भारतीय सेना ने बाकयदा एक ऑपरेशन छेड़ा था जिसका एक कोडनेम था लेकिन सुरक्षा कारणों से हम ये नाम नहीं बता रहे हैं.

तीन नई सड़क बनाने की जिम्मेदारी बीआरओ को सौंपी गई
लेकिन डोकलाम में (सैनिकों के ) मोबिलाईजेशन के दौरान भारतीय सेना को डोकलाम तक पहुंचने में भारी दिक्कत आई थी. इसीलिए फेसऑफ खत्म होने के बाद भारत ने डोकला दर्रे तक पहुंचने के लिए तीन नई सड़क बनाने की जिम्मेदारी बीआरओ को सौंपी है. कूपूप-भीमबेस एक्सेस के अलावा बीआरओ ने पूर्वी सिक्किम के फ्लैग-हिल से भी एक और नई सड़क बनाई है जो डोकला दर्रे तक पहुंचती है. करीब 38 किलोमीटर लंबी इस‌ स्ट्रेटेजिक रोड पर काफी काम पूरा हो चुका है. अगले साल यानि 2020 तक ये सड़क भी पूरी तरह बनकर तैयार हो जायेगी.

ज़ुलुक एक्सेस पर भी बीआरओ ने काम शुरू किया
इसके अलावा पश्चिम बंगाल और सिक्किम की सीमा से सटे ज़ुलुक एक्सेस पर भी बीआरओ ने काम शुरू कर दिया है. ये सड़क ऐसे समय में काम आयेगी जब सिलिगुड़ी से गंगटोक जाने वाली सड़क बारिश या फिर लैंडस्लाईड के चलते बंद हो जायेगी. करीब 87 किलोमीटर लंबी ये सड़क रिशी और रोंगली से होते हुए कूपूप पहुंचेगी. इस‌ सड़क को डबल लेन बनाया जायेगा.

कमांडर अशोक गुप्ता के मुताबिक, कूपूप-भीमबेस रोड प्रोजेक्ट को वर्ष 2015 में शुरू कर दिया गया था लेकिन पर्यावरण क्लीयेरेंस ना मिलने के कारण काम रूका हुआ था. डोकलाम विवाद के बाद ही काम शुरू हुआ लेकिन फ्लैग हिल प्रोजेक्ट डोकलाम फेसऑफ के बाद ही शुरू किया गया. रिशी-रोंगली एक्सेस पहले एक कच्चा ट्रैक था जिसे अब डबल लेन बनाया जा रहा है.

 

भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स हर रोज मिलते हैं डोकलाम में
बता दें कि भले ही डोकलाम विवाद खत्म हो गया हो लेकिन भारत किसी भी तरह से चीन सीमा पर अब कमजोर नहीं पड़ने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के वुहान समिट (अप्रैल 2018) के बाद से डोकलाम में 'स्टेट्स क्यो' बना रहे इसके लिए भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स हर रोज डोकलाम में सुबह 8.30 बजे एक साथ चाय पीते हैं. भारतीय सेना के एक सीनियर अधिकारी ने एबीपी न्यूज को बताया कि भले ही डोकलाम में बारिश हो या बर्फबारी दोनों देश के कमांडर सुबह चाय पर जरूर मिलते हैं. इसमें सीमा (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर पैट्रोलिंग या फिर किसी और विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है. अगर कोई मुद्दा ना भी हो तो भी कमांडर सुबह जरूर मिलते हैं.

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